गुरुग्राम। जिले में कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इस बारे में जिम्मेदार अधिकारी और विभाग दोनों ही कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। पीड़ित परिवार लगातार फोन करते हैं लेकिन फोन उठते नहीं। इन हालातों में परेशान लोग पांच से आठ हजार रुपये में निजी एंबुलेंस में शव को श्मशानघाट ले जाकर अंतिम संस्कार कराने को मजबूर हैं। एंबुलेंस संचालक का कहना है कि पहले से ही तीस शव यहां हैं।
बुधवार को प्रशासन ने कोरोना संक्रमण से चार लोगों के मरने की पुष्टि की है। जबकि इन शवों को ले जाने वाले एंबुलेंस के संचालक योगेश राजपूत की मानें तो बुधवार को कोरोना संक्रमण से करीब 30 लोगों के शवों का श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार कराया गया है। उन्होंने अस्पताल से श्मशानघाट तक कई संक्रमितों के शव ले जाने से इंकार कर दिया। बोले, पहले से ही कई शव श्मशानघाट तक ले जाने की बुकिंग है। इनका कहना था कि प्राइवेट एंबुलेंस से व्यवस्था करा लो तो बेहतर होगा। कई परिजनों ने तो श्मशानघाट की तीन से पांच किलोमीटर दूरी तक के पांच हजार रुपये दिए हैं।
नगर निगम के अफसरों के अनुसार, अंतिम संस्कार कराने वालों में करीब आधा दर्जन संक्रमित शहर के घरों में आइसोलेट होने वाले हैं। जबकि यहां के नामचीन अस्पतालों में इलाज कराने वाले दूसरे शहर तथा प्रांतों के संक्रमितों के भी एक दर्जन से अधिक शव बताए जा रहे हैं। जिनको प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शामिल नहीं किया है। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष सिंगला का कहना है कि बुधवार को शहर के विभिन्न कोविड श्मशानघाटों पर करीब 30 शवों का अंतिम संस्कार किया गया है।