टावरों की छोटी सी खामी को भी गंभीरता से लेगी ऑडिट एजेंसी
15 सोसाइटियों के संरचनात्मक ऑडिट के पहले फेज पर निवासियों की राय मांगी
प्रशासन की पहल पर हुई एजेंसी, आरडब्ल्यूए व बिल्डर्स के बीच बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। लाइसेंस क्षेत्र की 15 हाउसिंग सोसाइटीज के संरचनात्मक ऑडिट की प्रक्रिया का पहला चरण पूरा होने के बाद प्रशासन ने तय किया है कि निवासियों के छोटे-छोटे बिंदु जैसे पानी का रिसाव और सीलन आदि को भी गंभीरता से लिया जाएगा। इनका स्थायी समाधान किया जाएगा। इसके अलावा बिल्डर अपनी मर्जी से किसी भी एजेंसी से एनडीटी (नॉन-डिस्टेक्टिव टेस्ट) करवा लें लेकिन ऑडिट रिपोर्ट सिर्फ प्रशासन द्वारा तय की गई एजेंसी की ही मान्य होगी। इस एजेंसी के काम में बिल्डर का कोई दखल नहीं होगा। ऑडिट का दूसरा चरण अप्रैल में शुरू होगा।
शनिवार को प्रशासन ने पहले फेज की प्रक्रिया के दौरान संबंधित रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी (आरडब्ल्यूए) और ऑडिट करने वाली एजेंसियों के बीच वार्ता की पहल की जिससे ऑडिट के दौरान रही किसी कमी को समय रहते जांच में शामिल किया जा सके। इस संबंध में लघु सचिवालय के कांफ्रेंस हॉल में आयोजित बैठक में संबंधित बिल्डर्स के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इसमें ऑडिट का पहला फेज पूरा होने के दौरान सामने आए विषयों के समाधान को लेकर विचार किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को अहम बिंदू बताते हुए उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा, प्रशासन ने जो चार एजेंसी स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए नामित की हैं उनके काम में बिल्डर्स का कोई हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा। ऑडिट एजेंसी का निर्धारित भुगतान प्रशासन के माध्यम से ही बिल्डर द्वारा वहन किया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में जो सुझाव शामिल होंगे उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा कि किस तरह की रिपेयरिंग या बदलाव की जरूरत है। इस प्रक्रिया में भी संबंधित सोसाइटी के निवासी आरडब्ल्यूए के माध्यम से अपना पक्ष रख सकेंगे और उनकी सहमति के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। बैठक में निवासियों ने उपायुक्त से शिकायत की कि कुछ बिल्डर्स अपने स्तर पर स्ट्रक्चर का नॉन-डिस्टेक्टिव टेस्ट करवा रहे हैं। स्पष्ट किया कि बिल्डर अपने स्तर पर किसी भी तरह का टेस्ट करवाने के लिए स्वतंत्र है लेकिन प्रशासन द्वारा निर्धारित एजेंसी और प्रक्रिया के तहत होने वाले टेस्ट की रिपोर्ट ही मान्य होगी।
ऑडिट एजेंसियों के प्रतिनिधियों को उपायुक्त ने निर्देश दिए कि ऐसे स्ट्रक्चर की भी पहचान करें जो इमारत के लिए बेशक खतरा नहीं है लेकिन उसमें सुधार या रिपेयरिंग की गुंजाइश महसूस होती हो। निवासियों द्वारा पानी रिसाव सहित कई छोटे बिंदुओं की ओर ध्यान दिलाने पर ऑडिट एजेंसियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि ऐसे विषयों को भी ध्यान में रखा जाए। ऐसे विषयों पर बारीकी से काम किए जाने की जरूरत है जो आज बेशक सामान्य हैं लेकिन भविष्य में उनके कारण समस्या उत्पन्न होने की आशंका हो, समय रहते इन विषयों से निपटने या समाधान करने की जरूरत है। संरचनात्मक ऑडिट का दूसरा फेज अप्रैल महीने से शुरू होगा। इसके लिए तैयारियों की जा रही हैं। बैठक में एडीसी विश्राम कुमार मीणा, डीटीपी ई मनीष यादव भी मौजूद रहे।
चिंटेल्स की सभी नौ टावरों का हो रहा है ऑडिट
गुरुग्राम। बैठक के बाद एडीसी विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावर डी, ई और एफ की रिपोर्ट आ चुकी है। इन्हें संरचनात्मक ऑडिट करने वाली एजेंसी ने रहने के लिए असुरक्षित बताया है। अभी सभी टावर्स की ऑडिट प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। उम्मीद है अगले डेढ़ से दो महीने में यह पूरी हो जाएगी। सभी 9 टावर्स की रिपोर्ट आने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फ्लैट्स की वैल्यूएशन रिपोर्ट के बाद निवासियों की आपत्तियां और सुझाव सुनकर स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा मूल्यांकन करवाया गया है। तकनीकी रूप से मूल्यांकन में आई खामियों पर भी ध्यान दिया गया। इसके बाद सामने आई वेल्यू बिल्डर व निवासियों के साथ साझा की है। इसके जल्द समाधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है।