गुरुग्राम। पिछले साल जून में उद्योग विहार पुलिस थाने में हुए पैसे के लेनदेन व धोखाधड़ी के मामले में शनिवार को पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसमें एनसीएलटी द्वारा नियुक्त अश्विनी मेहरा को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने अपनी जांच में अश्विनी मेहरा के साथ कंपनी में ऑडिट करने वाली दो अन्य कंपनियों के प्रबंधकों को भी आरोपी बनाया है। साल 2020 में मिली शिकायत पर दावा किया गया था कि मुख्य आरोपी डफ ऐंड पहलपस कंपनी में पहले काम कर चुकी है। चार्जशीट में करोल एसोसिएट के प्रबंधक तरुण भाटिया और डफ एंड पहलपस कंपनी के इंडिया के प्रबंधक संचालक अविरल जैन को आरोपी बनाया गया है ।
एडुकाम इंफ्रास्ट्रक्चर एंड स्कूल मैनेजमेंट ने 2017-2018 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) चंडीगढ़ में दिवालिया घोषित करने के लिए याचिका डाली थी। एनसीएलटी ने इन्सॉल्वेंसी एक्ट (दिवालिया एक्टृ) के चलते कंपनी की दायर याचिका पर अप्रैल 2018 को मनोज माहेश्वरी को अंतरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया। मनोज माहेश्वरी की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते जून 2018 में अश्विनी मेहरा को एडुकाम इंफ्रास्ट्रक्चर एंड स्कूल मैनेजमेंट कंपनी में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया गया। पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि एडुकाम इंफ्रास्ट्रक्चर ऐंड स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ सीबीआई में 1990 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज है।
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करोल एसोसिएट कंपनी डफ एंड पहलपस इंडिया की सहयोगी कंपनी है। डफ एंड पहलपस कंपनी के साथ मनोज माहेश्वरी और अश्विनी मेहरा कंसल्टेंसी एग्रीमेंट में 2017 से थे। पुलिस की जांच में पता चला कि करोल कंपनी द्वारा ऑडिट 2014 - 2018 तक के लिए 28 लाख रुपये की मांग की गई थी लेकिन अश्विनी ने दोबारा से ऑडिट करवाया तो डुकाम इंफ्रास्ट्रक्चर एंड स्कूल मैनेजमेंट कंपनी के खाते से 50 लाख 74 हजार रुपये का भुगतान किया गया। कंपनी ने कानूनी सलाह के नाम पर भी 74 लाख रुपये का भुगतान किया था। पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में बताया गया कि मुख्य आरोपी की ओर से कंपनी के पूर्व बोर्ड के सदस्यों को झूठी रिपोर्ट बनाकर फंसाने की धमकी भी दी जाती थी।