गुरुग्राम (पंकज मोहन मिश्रा)। सिविल लाइंस स्थित ईएसआई डिस्पेंसरी की इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। दीवारों ये प्लास्टर गिरते रहते हैं। ऐसे में यहां रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों पर खतरा मंडराता रहता है। वहीं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में ईएसआई की तरफ से यदि लिखित में कहा जाता है, तो जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
18 जुलाई को पटौदी में एक इमारत गिर गई थी। जिसके नीचे आधा दर्जन से ज्यादा लोग दब गए थे। सिविल लाइंस में भी ईएसआई डिस्पेंसरी की हालत अत्यंत जर्जर है। स्थिति यह है कि प्लास्टर गिर रहा है तो छत पर लंबे समय तक बारिश का पानी जमा होने से वह भी कमजोर हो चुकी हैं। खिड़कियों से प्लास्टर गिरते रहते हैं, तो दीवारों पर काई जम गई है।
जलनिकासी की व्यवस्था बदहाल
ईएसआई डिस्पेंसरी में आलम यह है कि थोड़ी सी बारिश में हर ओर पानी भर जाता है। जो कि तीन-चार दिन तक भरा रहता है। चारों तरफ घास-फूस, बड़ी-बड़ी झाड़ियां और हर तरफ फैले बायोमेडिकल वेस्ट के चलते यहां पर मच्छर भी पनप रहे हैं। वहीं, डिस्पेंसरी के पीछे सीवर के मैनहोल का ढक्कन खुला पड़ा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
पीडब्ल्यूडी से तालमेल का अभाव
मेडिकल ऑफिसर राजीव खुंडानिया ने बताया कि पुराने नागरिक अस्पताल के साथ ही इस इमारत को भी पीडब्ल्यूडी ने जर्जर घोषित किया था। इमारत के नवनिर्माण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता संदीप सिंह ने इमारत की हालत से अनभिज्ञता जताई।
वर्जन-
यहां की इमारत बेहद जर्जर है। इलाज का कोई और विकल्प नहीं है, जिसके कारण आना पड़ता है। दीवारों की हालत देखने पर ऐसा लगता है कि यह कभी भी गिर सकती है। - राजाराम, निवासी कादीपुर
इसकी जर्जर हालत को देखकर इमारत के अंदर खड़े होने में भी डर लगता है। खिड़कियों व दीवारों में दरारें आ गई हैं। इसे भी गिराकर नई इमारत का निर्माण किया जाना चाहिए। - रमेश, निवासी सूरतनगर
इस बारे में जानकारी नहीं है कि इसे कब जर्जर घोषित किया गया है। अगर जर्जर घोषित किया गया है तो ईएसआई प्रबंधन को इमारत खाली कर देनी चाहिए। अगर ईएसआई की तरफ से कोई लिखित पत्र प्राप्त होता है तो हम जरूर कार्रवाई करेंगे। - संदीप सिंह, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग