गुरुग्राम। वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिए हैं कि वृद्धा द्वारा तीनों पुत्रों के नाम ट्रांसफर की गई भूमि की डीड समाप्त कर दी जाए। जिससे कि उस जमीन से होेने वाली आय से वह जीवन-यापन कर सकें।
ट्रिब्युनल के सदस्य अधिवक्ता बीएस चौधरी और अरविंद कुमार ने बताया कि वजीराबाद की वृद्धा बर्फी देवी ने अपने पुत्र शीशपाल, जगदीश व ब्रह्मसिंह के खिलाफ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि उसने अपने तीनों पुत्रों के नाम भूमि ट्रांसफर कर दी थी, ताकि बुढ़ापे में उसके पुत्र सब सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे और देखभाल करेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उसने अपने पुत्रों पर आरोप लगाते हुए कहा कि तीनों पुत्रों ने सभी सेवाएं बंद कर दी हैं और उन्हें घर से भी निकाल दिया है। अब वह अकेली रह रही हैं। पुत्र व परिजन दुर्व्यवहार करते हैं। पति भी साथ नहीं रह रहा है, इसलिए पुत्रों के नाम ट्रांसफर की गई भूमि को वापस दिलाया जाए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को न्यायालय में तलब किया, हालांकि पुत्रों ने इस आरोप को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इस भूमि से प्रतिवर्ष करीब छह लाख रुपये की आमदनी वृद्धा को होती है। पुत्र शीशपाल ने आरोप लगाया कि वृद्धा ने दोनों पुत्रों के बहकावे में आकर ये शिकायत दी है। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्क सुने। न्यायालय ने पाया कि वृद्धा की गुहार में दम है। उन्हें उचित मान-सम्मान व सुविधाएं पुत्रों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उनकी गुहार को स्वीकार करते हुए ट्रिब्यूनल ने ट्रांसफर की गई डीड को नल एंड बॉयड घोषित करते हुए पुत्रों को हिदायत दी है कि वे वादी की भूमि का कब्जा शांतिपूर्वक तरीके से उन्हें दे दें, ताकि वह भूमि की आय से अपना जीवन-यापन कर सकें। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने वृद्धजनों के कल्याण के लिए ट्रिब्युनल का गठन किया हुआ है।