- उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि को 6 प्रतिशत ब्याज दर के साथ लौटाने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। बिजली चोरी के मामले की निगम द्वारा निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील चौहान की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए बिजली निगम को आदेश दिए कि वह उपभोक्ता द्वारा जमा कराई गई जुर्माना राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज दर से करे।
गांव तिघरा निवासी रघुवीर के घर 28 सितंबर 2016 को बिजली निगम के कुछ लोग आए और कहा कि एक नियमित जांच की जा रही है। उसेे तीन अक्तूबर 2016 को सनसिटी सब डिविजन कार्यालय बुलाया और मीटर बाईपास कर बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए उस पर 2 लाख 46 हजार 029 रुपये का जुर्माना लगा दिया। उसने बिजली निगम के अधिकारियों से गुहार भी लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बिजली का कनेक्शन कहीं कट न जाए, इस डर से उपभोक्ता ने पूरी जुर्माना राशि जमा करा दी। उसके बाद उपभोक्ता ने बिजली निगम के खिलाफ 24 अक्तूबर 2016 को अदालत में केस कर दिया था। तत्कालीन सिविल जज अंतरप्रीत सिंह की अदालत ने सुनवाई करते हुए बिजली चोरी के मामले को गलत पाया और निगम को आदेश दिए कि जमा कराई गई जुर्माना राशि को 6 प्रतिशत ब्याज दर से वापस करें। बिजली निगम ने निचली अदालत के आदेश को वर्ष 2019 की 8 अप्रैल को जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील कर दी। इस पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील चौैहान की अदालत ने अपील को खारिज कर दिया। बिजली निगम को आदेश दिए कि निचली अदालत के आदेश का पालन करें। अधिवक्ता का कहना है कि मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के कारण उपभोक्ता बिजली निगम के अधिकारियों के विरुद्ध मानहानि का केस दायर करने की तैयारियों में जुट है।