कंसल्टेंट एजेंसी को सौंपा कार्य, जीएमडीए सेक्टर 107 में बनाया जाएगा संयंत्र
पहले चरण में 100 एमएलडी पर कार्य शुरू होगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। न्यू गुरुग्राम के लिए सेक्टर-107 में प्रस्तावित सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने का कार्य कंसल्टेंट एजेंसी को सौंप दिया गया है। एजेंसी एसटीपी का डिजाइन और डीएनआईटी तैयार करेगी।
द्वारका एक्सप्रेसवे से लगते सेक्टरों में सीवर के गंदे पानी की निकासी और शोधन का इंतजाम नहीं है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की सेक्टर 107 में 200 एमएलडी के एसटीपी के निर्माण की योजना है। इस पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। हालांकि पहले चरण में 100 एमएलडी पर कार्य शुरू होगा।
इस परियोजना को जीएमडीए बोर्ड बैठक से मंजूरी मिली हुई है। जीएमडीए ने नगर निगम ने करीब 50 एकड़ जमीन ली है और करीब 50 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। जीएमडीए ने नगर निगम से जमीन की पैमाइश कर अपना कब्जा ले लिया है।
जीएमडीए ने एसटीपी की डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी रखने के लिए निविदा जारी की थी। इसमें एक एजेंसी को डीपीआर तैयार करने का काम सौंप दिया गया है। इस कार्य को एजेंसी को पांच माह में पूरा करना है। हालांकि जीएमडीए ने एजेंसी को तीन माह में डीपीआर और डीएनआईटी तैयार कर देने को कहा है ताकि परियोजना पर जल्द काम शुरू हो सके। जीएमडीए न्यू गुरुग्राम में सीवर लाइनों को पूरा करा रहा है। सेक्टर 99 से 115 तक तक बिछाई जाने वाली मास्टर सीवर लाइन को सेक्टर 107 में सीवर शोधन संयंत्र से जोड़ा जाएगा।
द्वारका एक्सप्रेसवे के शुरू होने से नए सेक्टरों का तेजी से विकास हो रहा है। सेक्टर 68 से 95 और सेक्टर 99-115 तक सोसाइटियां बस रही हैं। वहीं, बिल्डर भी अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में इन सेक्टरों में आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अब लोगों को परेशानी होने लगी है। कई जगहों पर सीवर का पानी खाली जगहों में डाला जा रहा है। ऐसे में जगह-जगह गंदे पानी के तालाब बन गए हैं।
जीएमडीए के अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार ने बताया कि एसटीपी से न्यू गुरुग्राम में सीवर के पानी के शोधन की बेहतर व्यवस्था हो जाएगी। वर्तमान में धनवापुर एसटीपी से 218 एमएलडी और बेहरामपुर में 170 एमएलडी पानी का शोधन हो रहा है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए बनेगा 20 एमएलडी का सीईटीपी
औद्योगिक इकाइयों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण को सिरे चढ़ाने में जीएमडीए जुट गया है। जीएमडीए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवा रही है। इसके लिए कंसल्टेंट को कार्य सौंप दिया गया है। 20 एमएलडी का संयंत्र सेक्टर-34/35 (खाड़सा गांव) में तैयार किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने में घरेलू सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) पूरी तरह से कारगर नहीं हैं। इसे देखते हुए औद्योगिक गंदे पानी को साफ करने के लिए अलग से सीईटीपी की जरूरत है। जीएमडीए ने औद्योगिक इलाकों के आसपास संयंत्र लगवाने की योजना तैयार की है। इस पर करीब 120 करोड़ खर्च होंगे।
यमुना का पानी हो रहा दूषित
एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सख्त निर्देश है कि यमुना नदी में शोधित पानी को ही डाला जाए लेकिन जिले में पर्याप्त सीवर शोधन संयंत्र नहीं होने से सैकड़ों लीटर पानी नजफगढ़ ड्रेन के माध्यम से यमुना में गिर रहा है। दूसरी ओर उद्योगों का भी गंदा पानी चोरी छिपे नालों में डाल दिया जाता है। यमुना एक्शन प्लान के तहत यमुना नदी के पानी को दूषित होने से बचाने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार है। इसके तहत घरेलू और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीसदी शोधित करने की योजना है। इसके लिए पुराने एसटीपी की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। मानेसर में भी बीस एमएलडी का संयंत्र लगाया जा रहा है।