डाइटिशियन शालिनी गार्विन बताती हैं कि व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए। एक समय अंतराल के बाद पानी, जूस, दूध, स्मूदी आदि का सेवन करते रहना चाहिए। इसके अलावा फल कार्बोहाइड्रेट, फाइबर का विशेष स्रोत होते है जो व्रत के दौरान एनर्जी देते है, ऐसे में फलों का सेवन भी किया जा सकता है।
टाइप-1 मधुमेह वाले लोगों को आमतौर पर व्रत न करने की सलाह दी जाती है। टाइप-2 मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले लोग जिनकी स्थिति आहार या दवा के माध्यम से नियंत्रण में है वे व्रत करने में सक्षम हो सकते हैं हालांकि उन्हें भी विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार व्रत रखना चाहिए।
चीफ क्लीनिकल न्यूट्रिशियन नीलिमा बिष्ठ बताती हैं कि व्रत के दौरान एक संतुलित आहार लेना जरूरी है। यदि हम ज्यादा समय तक बिना कुछ खाए पिंए रहते हैं तो भी दिक्कत हो सकती है। वहीं ज्यादा मात्रा में खाने से भी शरीर को नुकसान हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने से पहले अपनी व्यक्तिगत स्थिति का आकलन करना चाहिए। विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए कि उनके लिए उपवास सुरक्षित है या नहीं।