गुरुग्राम (अंजू सिंह)। सालों पहले 4 कॉलेजों की मंजूरी मिल गई, काम भी शुरू हो गया, लेकिन बिल्डिंग अभी तक तैयार ही नहीं हो पा रही है। इन कॉलेजों के भवन अधूरी दीवारों में ही अटके हुए हैं। जिले को पिछले 6 सालों में सेक्टर- 52, मानेसर, रिठौज और फर्रुखनगर में 4 नए कॉलेजों सहित गुरुग्राम विश्विद्यालय की सौगात मिली। कॉलेजों के भवन तैयार नहीं होने से छात्र कहीं स्कूल के भवन में पढ़ रहे हैं तो कहीं शेड के नीचे। ये हाल तब है जब कॉलेजों की मंजूरी देते समय सीएम ने इन भवनों को एक साल में तैयार होने का दावा किया था।
गुरुग्राम विश्विद्यालय बनाने की घोषणा 2015 में की गई थी जहां अभी तक बाउंड्री और द्वार निर्माणाधीन है। हालांकि चारों कॉलेजों में यूजी कोर्सों के तहत दाखिले दिए जा रहे हैं। भवन नहीं होने पर स्कूलों के भवनों में कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इन भवनों का काम एक साल में पूरा होना था, मगर नहीं हो पाया। वर्ष 2020 में भवन निर्माण कार्य पूरा होने की पूरी उम्मीद की जा रही थी। लेकिन दिसंबर माह तक एक भी इमारत पूरी नहीं हो सकी। कहीं जमीनी विवाद तो कहीं कोरोना इन इमारतों को पूरा करने का बड़ा बहाना बन रहा है।
बिल्डिंग पूरी, अधूरी बाउंड्री की वजह से नहीं लगी कक्षाएं
सेक्टर-52 में बन रही कॉलेज की बिल्डिंग 2019 में ही तकरीबन पूरी हो चुकी थी। वहीं कोरोना काल से पहले कॉलेज की बाउंड्री बनाने का कार्य किया जा रहा था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से काम रुका। हालांकि अनलॉक हुए भी तीन महीने बीत चुके हैं लेकिन कार्य अभी तक अधूरा है। इस सत्र भी सेक्टर-40 स्थित बचपन शाला में छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। कॉलेज प्राचार्य रफीक खान ने बताया कि इमारत में सभी कार्य पूरे हो चुके हैं। बाउंड्री का पूरा होना बाकी है। जल्द ही कार्य पूरा हो जाएगा।
शुरु ही नहीं हुआ मानेसर कॉलेज का निर्माण
मानेसर कॉलेज की घोषणा 29 नवंबर 2014 में की गई थी। लेकिन वन विभाग द्वारा कॉलेज निर्माण के लिए अभी तक एनओसी नहीं मिली है। 6 वर्षों से कॉलेज की फाइल दफ्तरों में घूम रही है। कॉलेज को 7 एकड़ जमीन में बनाया जाना है। यहां बड़ी संख्या में पेड़ों को काटना पड़ेगा। ऐसे में अभी तक कॉलेज निर्माण प्रारंभ नहीं हो पाया है। प्राचार्य सुषमा चौधरी ने बताया कि तीन सत्रों से कक्षाएं पॉलिटेक्निक में लगाई जा रही है। कॉलेज के भवन निर्माण के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
कोरोना की वजह से रुका फर्रुखनगर और रिठौज कॉलेज का काम
फर्रुखनगर और रिठौज कॉलेज बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा 2015 में की गई थी। दोनों कॉलेज में इस सत्र कक्षाएं शुरू करने की उम्मीद की जा रही थी। फर्रुखनगर कॉलेज प्राचार्य अनुपमा ने बताया कि अभी 30 फीसदी तक ही कार्य पूरा हो सका है। कोरोना की वजह से कार्य पूरा नहीं हो सका। कक्षाएं सरकारी कॉलेज में चल रही हैं। वहीं रिठौज भवन का कार्य इन दिनों प्रगति पर है। यहां 70 फीसदी तक कार्य पूरा हो चुका है।
पुराने कॉलेजों में भी जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं छात्र
जिले में राजकीय महिला महाविद्यालय, द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय और राजकीय महाविद्यालय सेक्टर-9 पुराने कॉलेज हैं। जिले में छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर बिल्डिंग की कमी रहती है। ऐसे में वर्षों से छात्र शेड में पड़ी बैंच या खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। मौसम खराब होने पर छात्रों को छुट्टी कर घर बैठना पड़ता है। कोरोना काल के बाद छात्रों के लिए उचित बैठने की व्यवस्था करना भी कॉलेजों के लिए चुनौती है।
सभी कॉलेजों भवन निर्माण इन दिनों शुरू हो चुका है। कार्य इन दिनों प्रगति पर है। जल्द ही सभी कॉलेजों का भवन निर्माण पूरा हो जाएगा।
- आरके गर्ग, नोडल अधिकारी, प्राचार्य राजकीय महिला महाविद्यालय, सेक्टर- 14