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फर्जी भवन मालिक बनकर करा ली फ्लैट की रजिस्ट्री

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गुरुग्राम। करीब 15 साल पहले परिचित दंपती को किराये पर मकान देना उत्तराखंड के एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। इस दौरान किराये पर रहने वाले व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी अब भी इस मकान में रह रही है। महिला को मकान खाली करने को कहा गया तो उसने बताया कि मकान उसके पति ने खरीद लिया था। आरोप है कि फर्जी भवन मालिक खड़ा करके तहसील में इस मकान की रजिस्ट्री करा ली गई। डीएलएफ फेज दो थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
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पुलिस को यह शिकायत उत्तराखंड के अल्मोड़ा के नौगांव निवासी अनिल कुमार ने दी है। फिलहाल वह दिल्ली के आया नगर में रहता है। आरोप है कि साल 2000 में वह डीएलएफ सिटी पार्ट-1 में रहता था। उस दौरान ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में डीएलएफ पार्ट-2 ऑकवुड एस्टेट में तीसरी मंजिल का फ्लैट निकला था। 20 जून 2001 को इस पर कब्जा मिला था जिसकी रजिस्ट्री 19 अप्रैल 2004 को हुई थी। इस फ्लैट में बिजली का मीटर भी उसके नाम पर लगा था। आरोप है कि उस समय ये फ्लैट अपने गांव के ही गोविंद और उसकी पत्नी दीपा को किराये पर दे दिया था। साल 2007 में अनिल अपने गांव चला गया था। साल 2015 में गोविंद की मौत हो गई। यह पता चलने पर अनिल गुरुग्राम आया और गोविंद की पत्नी दीपा को कहा कि उसे रुपयों की जरूरत है और अपने इस मकान को बेचना चाहता हूं, इसलिए खाली कर दें।
इस पर महिला ने कहा कि उसे 2-3 महीने का समय चाहिए लेकिन बार-बार कहने पर भी 2-3 महीने बाद भी खाली नहीं किया। अनिल कुमार फिर मकान पर गया तो महिला ने कह कि यह मकान तो उसके पति ने खरीद लिया था जबकि अनिल अपने इस मकान को बेचने का करार सिविल लाइन निवासी अक्षय गुप्ता से कर चुका था। मकान की रजिस्ट्री अक्षय गुप्ता के नाम कराने अनिल जब तहसील कार्यालय पहुंचा, तो पता चला कि यह मकान तो दीपा देवी के नाम हो चुका है। पता चला कि अनिल नामक किसी व्यक्ति ने इस मकान की रजिस्ट्री दीपा के नाम कराई। तब पता चला कि किसी फर्जी व्यक्ति ने अनिल बनकर यह फर्जीवाड़ा किया। अब महिला के खिलाफ डीएलएफ फेज-2 थाना में फर्जी दस्तावेज तैयार कर ठगी का मामला दर्ज किया गया है।
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