प्रेमचन्द पालमी
पटौदी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामलला की 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के लिए मिट्टी के दीये तैयार करने को गांवों में चाक जनवरी माह में ही तेजी से घूमने लगे हैं। सर्दी के इस मौसम में न तो गर्मी के लिए घड़े तैयार किए जा रहे हैं और न ही हांडी। घूमते चाक पर कारीगरों के हाथ तेजी से दीये बनाने में लगे हैं। माना जा रहा है कि साइबर सिटी में 22 जनवरी को 31 लाख दीये जलाए जाएंगे। ऐसे में दीयों को बनाने से लेकर इनकी बिक्री तक के लिए दुकानें तैयार हो गई हैं।
आमतौर पर मिट्टी के बर्तन जैसे घड़े, पानी की बोतल, कुल्हड़ आदि बनाने वाले कारीगर जनवरी की ठिठुरती सर्दी में अपने चाक को आराम देते हैं। इस बार 22 जनवरी को यूपी के अयोध्या में राम मंदिर स्थापना को लेकर पूरे देश में अलग ही माहौल है। आरएसएस, विहिप समेत अन्य हिंदू और सामाजिक संगठनों द्वारा घर-घर जाकर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन निकटतम मंदिर में आने का निमंत्रण अक्षत के माध्यम से दे रहे हैं। इसके साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि वह इस दिन को दिवाली की तरह ही मनाएं। ऐसे में लोगों ने अपने घरों से लेकर दुकान, प्रतिष्ठान और कंपनियों तक में दीपक जलाने की बात कही है। मंदिरों को भी दीयों से सजाए जाने की बातें हो रही हैं। इसके लिए दीये बनाने वाले कारीगरों का पहले ही ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
दिवाली से ज्यादा दीयों की मांग
पटौदी खंड के गांव मिल्कपुर निवासी बलजीत प्रजापति ने बताया कि यह उनकी चौथी पीढ़ी है जोकि मिट्टी के दीये और बर्तन बनाती है। 22 जनवरी को अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से पांच दीये जलाने का आह्वान किया है। इसी कारण हमने अपना चाक चला दिया है। फिलहाल सिर्फ दीये बनाने का काम किया जा रहा है। बलजीत ने बताया कि दिवाली पर वह करीब एक लाख दीपक बनाते हैं। इस बार दिवाली से ज्यादा दीयों की मांग है। जैसे-जैसे लोगों द्वारा मांग बढ़ रही है उसी हिसाब से में दीपक बना रहा हूं। उन्होंने बताया कि उनके पास अभी तक एक-दो जगहों से दीयों का आर्डर मिला है। बलजीत जैसे ऐसे ही कितने अन्य लोग भी दीये बनाने में जुटे हैं। इसके साथ ही बाजारों में दीयों की दुकानें भी सज गई हैं।