गुरुग्राम। सुभाष चौक के पास गांव इस्लामपुर में मकानों और दुकानों को ध्वस्त किए जाने के विरोध में लोग आक्रोशित हो उठे हैं। यहां तोड़फोड़ के बाद मलबा उठाने पहुंचे एक डंपर और जेसीबी की हवा निकालने के बाद लोगों ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया। इसके साथ ही एचएसवीपी और नगर निगम के खिलाफ वहां पर सोमवार को 10 गांवों की पंचायत हुई। धरने पर बैठे लोगों का आरोप है कि यह तोड़फोड़ एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए अवैध रूप से की गई है। इसी संबंध में 13 मई को फिर से सभी गांवों की महापंचायत बुलाई गई है। धरने पर मौजूद नाहर सिंह कहते हैं कि जहां पर धरना लगा है, वहां पीछे की ओर एक बिल्डर को दो एकड़ में कॉलोनी काटने का लाइसेंस दिया गया है। उस कॉलोनी का रास्ता 16 फीट का है। इस रास्ते के चलते बिल्डर की कॉलोनी में प्लॉट नहीं बिक रहे हैं। उसे 80 फीट के रास्ते की जरूरत है। इसी के चलते बिल्डर के इशारे पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने यहां पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।
नाहर सिंह कहते हैं कि महासिंह, रोहताश, कंवर सिंह और प्रकाश की जमीन में बने मकान और दुकानों में तोड़फोड़ की गई। अवैध तोड़फोड़ के लिए दलील दी गई कि यहां पर ग्रीन बेल्ट है। ऐसा है तो वह अपनी और ज्यादा जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन यह बेल्ट इन तीन भूखंडों पर ही लागू क्यों की जा रही है। सभी भूखंडों पर मानक लागू होना चाहिए। धरने पर बैठीं महिलाओं की मांग है कि जिस तरह उनके मकान और दुकानों को तोड़ा गया है उन्हें फिर से बनवा कर दिया जाए।
नाहर सिंह कहते हैं कि जीएमडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। जब उन्होंने पूरी स्थिति को समझा तो स्वीकार किया कि गांव वालों के साथ गलत हुआ है। इसी तरह तोड़फोड़ के बाद मलबा उठाने आए लोग भी किसी तरह का कोई आदेश नहीं दिखा सके। धरने पर 360 गांव के चौधरी श्याम बाबा, नाहरपुर के सरपंच अशोक, चकरपुर के प्रदीप कुमार, झाड़सा के साहब सिंह, सतबीर, डॉ. कृष्ण, जाट समाज के पूर्व अध्यक्ष डा. राठी, राजेश, दलबीर, जयसिंह लंबरदार, सरपंच सतर सिंह, डाल चंद कश्यप आदि अन्य मौजूद थे।