गरीब व कमजोर वर्गों को घर दिलाने के उद्देश्य से शुरू हुई प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य नगर निगम गुरुग्राम में काफी मंद गति से चल रहा है। हालांकि, इसके लिए सिर्फ निगम प्रशासन ही नहीं बल्कि आवेदक भी जिम्मेदार हैं। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक 2017 में योजना की शुरुआत से अब तक सिर्फ 537 आवेदनों को स्वीकृत किया गया है। इसमें से वेरिफिकेशन के दौरान अधिकांश आवेदन योजना के मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद अंतिम तौर पर 87 को ही स्वीकृति मिली।
इन 87 में से 64 को योजना के तहत धनराशि जारी हो चुकी है जबकि 23 आवेदकों को जल्द ही पहली किस्त जारी की जाएगी। हालांकि, पीएम आवास योजना का लाभ उठाने के लिए नगर निगम को 1 हजार से भी ज्यादा आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से महज 537 को ही अंतिम तौर पर चुना गया। इनमें से सत्यापन के दौरान 450 आवेदन मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनको निरस्त कर दिया गया, जबकि 87 आवेदन स्वीकृत किए गए।
17 आवेदकों का भवन निर्माण पूरा
योजना के तहत स्वीकृत 87 आवेदनों में से 64 को पहली किस्त दी गई है, जबकि 54 आवेदकों को दूसरी किस्त दी गई है। वहीं, 17 आवेदकों के घरों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं 23 आवेदकों को अगले 1-2 माह में प्रथम किस्त जारी की जाएगी। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक आवेदनों के भौतिक सत्यापन के दौरान मालिकाना हक (ऑनरशिप प्रूफ) संबंधी दस्तावेज न होने के कारण अधिकांश आवेदन खारिज कर दिए गए, जबकि कई आवेदन ऐसे भी थे जो विवादित जमीन पर किए गए थे। निगम के अधिकारियों के मुताबिक योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को लाल डोरा क्षेत्र (ग्रामीण इलाके की नॉन रजिस्टर्ड जमीन) का निवासी होना चाहिए। इसके अलावा पटवारी, नंबरदार, पार्षद की तरफ से प्रमाणित जमीन व रजिस्टर्ड भू स्वामी भी योजना के तहत आवेदन का हकदार होता है।
तीन किस्तों में मिलती है धनराशि
योजना के तहत बीएलसी (बेनिफिसरी लेड कंस्ट्रक्शन) न्यू व बीएलसी इन्हांसमेंट है। बीएलसी न्यू के तहत आवेदक को नया घर बनाने के लिए 2.50 लाख रुपये दिए जाते हैं जबकि बीएलसी इन्हांसमेंट के तहत आवेदक पहले से निर्मित घर में कुछ नया हिस्सा जोड़ता है। इसके तहत भवन निर्माण के लिए आवेदक को सरकार की तरफ से 1.50 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। दोनों श्रेणियों के तहत लाभार्थी को तीन किस्तों में धनराशि दी जाती है। बीएलसी (न्यू) में 1-1 लाख की दो किस्त व 50 हजार की तीसरी किस्त दी जाती है, जबकि बीएलसी (आई) में 60-60 हजार की दो व 30 हजार की तीसरी किस्त दी जाती है।
सत्यापन के दौरान इतने आवेदन हुए निरस्त
वजह निरस्त आवेदन
आवेदक के भवन पहले से निर्मित पाए गए - 195
आवेदक की जमीन निगम क्षेत्र के बाहर थी - 08
आवेदक गुरुग्राम के मूल निवासी नहीं थे - 6
आवेदक 900 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में थे - 6
जमीन की मालिकना संबंधी दस्तावेज नहीं थे - 136
आवेदक के कांटेक्ट नंबर व पते सहीं नहीं थे - 75
आवेदक अन अप्रूव्ड एरिया के निवासी थे - 24
पीएम आवास योजना के मानकों पर खरे उतरने वाले सभी लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाना हमारा लक्ष्य है। कई बार योजना का गलत लाभ उठाने के उद्देश्य से अपात्र लोग भी आवेदन कर देते हैं, जिनका आवेदन भौतिक सत्यापन के दौरान निरस्त हो जाता है। आगे भी जो आवेदक योजना के मानकों पर खरे होंगे उनको पूरा लाभ दिलाया जाएगा।
समीर कुमार, नोडल अधिकारी (पीएम आवास योजना)