गुरुग्राम। संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष व प्रख्यात किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अपील के बाद राजीव चौक में चल रहे धरने में किसानों की संख्या बढ़ने लगी है। सोमवार को बड़ी संख्या में जिले भर से किसान धरनास्थल पर पहुंचे और तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ हुंकार भरी। किसानों ने कहा कि जब तक तीनों काले कानून रद्द नहीं हो जाते, वह चैन से नहीं बैठेंगे। रविवार को ही किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी धरनास्थल पर पहुंचे थे और किसानों में उत्साह का संचार किया था।
संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि अब जिले भर से किसान धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं और आगामी दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। सिर्फ गुरुग्राम ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश व देश में किसान तीनों कानूनों को लेकर आक्रोष में हैं। समय बीतने के साथ किसान आंदोलन की व्यापकता भी बढ़ रही है और यह जन आंदोलन बनता जा रहा है। यदि सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी तो देश का प्रत्येक नागरिक इस आंदोलन का हिस्सा बनेगा। आंदोलन को लेकर सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने बैठक भी की, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। इस मौके पर नवनीत रोज, दलबीर सिंह मलिक, बलवान सिंह दहिया, डॉक्टर धर्मबीर लॉटरी राठी, जयप्रकाश रहेड़ू, सुनील मलिक, मुकेश डागर, अमर दलाल, सूबे सिंह यादव, एडवोकेट अरुण शर्मा, एडवोकेट ब्रह्मप्रकाश शेहरावत, एडवोकेट सुमन सहरावत, एडवोकेट अनिल पंवार, ऊषा सरोहा, तेज राम, विजय यादव, रेखा यादव, समेत सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।
कहीं से भी नहीं हैं कृषि सुधार कानून
इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य व किसान नेता विजय यादव ने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए तीनों कानून कहीं से भी कृषि सुधार कानून नहीं है। इनमें किसानों के हितों की कोई बात नहीं की गई है। कृषि उपकरणों व उन्नत बीज समेत किसानों के हितों की कहीं बात नहीं की गई है। कृषि उपज का व्यापारीकरण कैसे किया जा सके, उस पर जोर दिया गया है। सरकार के मुताबिक छोटा आढ़ती बिचौलिया है तो फिर बड़े उद्योगपति क्या हैं। सिर्फ किसान ही नहीं आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं की हालत बेहद खराब हो जाएगी। किसानों ने कहा कि कश्मीर में जिस तरीके से पत्थरबाजी हो रही है, उसी तरीके से भाजपा व आरएसएस के लोग भी पत्थरबाजी कर रहे हैं। इस दौरान किसान नेताओं ने दक्षिण हरियाणा के लोगों से अपील करते हुए कहा कि आप परिवारवाद व वंशवादी राजनीति से बाहर निकलें और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें।