चिंटेल्स के असुरक्षित पांच टावर तोड़ने के लिए बीच का रास्ता चुनने में चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। चिंटेल्स के पांच असुरक्षित टावरों में रहने वाले परिवारों को अब प्रशासन ने नोटिस थमा दिया है। प्रशासन का तर्क है कि असुरक्षित टावर में हादसे की जिम्मेदारी समझते हुए लोगों को जल्द से जल्द यह टावर खाली करने होंगे। इस बीच यहां रहने वाले लोगों की समस्याओं पर बिल्डर को विचार करना होगा। बिल्डर को नोटिस की तय समय अवधि में ही अपने सिरे से पहल कर बीच का रास्ता निकालना होगा।
द्वारका एक्सप्रेसव-वे के सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पेराडाइसो में बार-बार हो रहे हादसों के बाद अब इसके पांच असुरक्षित टावरों को गिराने की तैयारी है। हालांकि पांच में से जी और एच टावर अभी भी 15 परिवार अपना घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में इन परिवारों को सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने घर खाली करने के नोटिस थमाए हैं। बावजूद इसके अभी भी इन परिवारों ने घर खाली करने का मन नहीं बनाया है। दरअसल, कुल नौ टावर वाली चिंटेल्स पेराडाइसो सोसायटी में कम से कम 15 और अधिकतम 20 फ्लोर के टावर बनाए गए हैं। आईआईटी दिल्ली की विश्लेषण टीम के अनुसार चिंटेल्स के पांच टावर डी, ई, एफ, जी, एच असुरक्षित घोषित हैं। हालांकि जी टावर की तकनीकी रिपोर्ट अभी भी लंबित है। बावजूद इसके प्राथमिक रिपोर्ट में इसे असुरक्षित ही माना गया है। साथ ही अन्य चार टावरों की सुरक्षा रिपोर्ट के लिए वार्षिक विश्लेषण के आधार पर ही सुरक्षित मानना होगा। एक बार के विश्लेषण से चिंटेल्स के सुरक्षित टावरों पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। मौजूदा समय में कुल 288 में से 132 फ्लैट मालिक पूरी तरह से अपना मन बनाकर बिल्डर के सुझाए दो में से एक विकल्प के साथ अपना घर खाली कर चुके हैं। इसमें से 110 परिवार बिल्डर को सेल डीड तक सौंप चुके हैं।ज्यादातर परिवारों ने 6500 रुपये प्रति स्कवाॅयर फीट के साथ स्टांप ड्यूटी का खर्च और जीएसटी के साथ इंटीरियर डिजाइन का भुगतान करने के लिए बिल्डर से करार कर समझौता कर लिया है। अन्य ने घर के बदले घर वाले दूसरे विकल्प को चुना है। हालांकि अभी भी 15 परिवार किसी भी रास्ते को चुनने के लिए तैयार नहीं हैं। इन परिवारों ने प्रशासन को विकल्प में कुछ और शर्तें जोड़ने के लिए आग्रह किया है।
हादसे के बाद चर्चा में आए चिंटेल्स के असुरक्षित टावर
बीते साल 10 फरवरी को गुरुग्राम के सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टॉवर डी की छठीं मंजिल की छत का एक हिस्सा गिर गया था। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। हादसे के करीब नौ महीने बाद गुरुग्राम के उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने एक प्रेसवार्ता में कहा था कि आईआईटी दिल्ली के एक्सपर्ट्स की संरचनात्मक जांच में यह टॉवर रहने योग्य नहीं पाया गया है। ऐसे में इसे ध्वस्त किया जाएगा।
प्रशासन और टावर निवासियों के सभी सुझाव को देखते हुए ही दो विकल्प बिल्डर की ओर से दिए गए। ज्यादातर परिवारों ने दो में से एक विकल्प अपनाते हुए बिल्डर को अपना मत स्पष्ट कर दिया है। बावजूद इसके 15 परिवार अपनी जिद पर बने हुए हैं। बिल्डर अब किसी अन्य शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। किसी भी अन्य प्रावधान का फर्क सभी परिवारों पर पड़ेगा। अब प्रशासन ही इन लोगों से घर खाली कराएगा।
- जेएन यादव, उपाध्यक्ष, चिंटेल्स बिल्डर
प्रशासनिक पहल के लिए लगातार बैठकें जारी हैं। असुरक्षित टावरों में रहने वाले 15 परिवारों को आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत नोटिस दे दिया गया है। ऐसे टावर में रहना जान का जोखिम उठाने जैसा है। इन परिवारों की सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया है। साथ ही बिल्डर से भी बीच का रास्ता निकालने के लिए कहा गया है। जल्द से जल्द यह टावर खाली कराने ही होंगे।
- हितेश कुमार, एडीसी गुरुग्राम