गुरुग्राम। नगर निगम की प्राथमिक जांच में दोषी पाई गई मलबा उठाने वाली कंपनी आईएल एंड एफएस ने निगम प्रशासन को सूचनाएं देने में भी आनाकानी की है। जांच के दौरान निगम ने कंपनी से बिंदुवार कई अहम जानकारियां मांगी थीं लेकिन कंपनी की तरफ से अधिकांश जानकारियां नहीं दी गईं। वहीं जो जानकारी दी गई वह अन्य माध्यमों से भी निगम को मिल सकती है। ऐसे में जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने जांच में भी सहयोग नहीं किया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक निगम प्रशासन ने आईएल एंड एफएस को बकायदा पत्र लिखकर इकरारनामा का पूर्ण रिकॉर्ड, स्टाफ सूची का पीएफ रिकॉर्ड समेत पूरा ब्योरा, कंपनी के द्वारा लगाई गई मशीनरी का विस्तृत ब्योरा व मशीनरी की खुद की फर्म होने पर उसका पूर्ण ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन इसमें से कुछ ही जानकारी दी गई। खास तौर पर वह सूचनाएं नहीं दी गईं, जो सार्वजनिक नहीं हैं। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जो जानकारियां दी गई हैं, वह किसी भी कार्यालय में सहज ही उपलब्ध हो सकती हैं। वहीं, आईएल एंड एफएस ने आरवी कंपनी के साथ करार करने के दौरान नगर निगम को सूचित भी नहीं किया।
हालांकि, इन तमाम मुद्दों पर आईएल एंड एफएस से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। कंपनी के पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। मालूम हो कि मलबा निस्तारण में बड़ा गड़बड़झाला सामने आने पर 30 जुलाई को मेयर मधु आजाद ने आनन-फानन में इस पूरे मामले की जांच संयुक्त आयुक्त-1 प्रदीप अहलावत को सौंप दी थी। संयुक्त आयुक्त ने सोमवार को इसकी जांच रिपोर्ट निगमायुक्त मुकेश कुमार आहूजा और मेयर मधु आजाद को सौंपी थी।