गुरुग्राम। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बृहस्पतिवार को भ्रूण लिंग जांच गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह में शामिल लोग गर्भवती महिलाओं को दिल्ली के दक्षिणपुरी स्थित एक डायग्नोस्टिक सेंटर में ले जाते थे और वहां पर अल्ट्रासाउंड कराते थे। जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुनियोजित तरीके से दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा, जहां से संचालक समेत चार लोगों को दबोच लिया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ साउथ दिल्ली के आंबेडकर नगर थाने में पीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है। उसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया तो वहीं अल्ट्रासाउंड मशीन को भी सील कर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें गुप्त सूत्रों से सूचना मिली थी कि धीरज और विनीत नामक दो लोग गुरुग्राम से गर्भवती महिलाओं को दिल्ली ले जाकर भ्रूण के लिंग की जांच कराते हैं, जिसके लिए 25,000 से 30,000 रुपये की मोटी रकम भी लेते हैं। जानकारी के आधार पर उन्होंने ने पीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप यादव के नेतृत्व में एक टीम गठित की।
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तैयार किया नकली ग्राहक :
टीम ने एक गर्भवती महिला को नकली ग्राहक के तौर पर तैयार किया, जिसके जरिए धीरज से संपर्क किया गया। धीरज को शक न हो इसलिए महिला ने उसको बताया कि वह पहले से दो बेटियों की मां है और अब वह लड़के लिए भ्रूण लिंग जांच कराना चाहती है। भरोसा होने पर धीरज ने 25,000 रुपये में भ्रूण लिंग जांच कराने की बात कही। उसने महिला को दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में बुलाया। बृहस्पतिवार को महिला धीरज के बताए गए पते पर पहुंची।
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क्रोमवेल डायग्नोस्टिक सेंटर में होती थी जांच :
कुछ देर बाद धीरज भी वहां पहुंच गया और पैसे लेने के बाद महिला को पास में ही स्थित क्रोमवेल डायग्नोस्टिक सेंटर में ले गया। वहां पर विनीत नामक एक अन्य युवक मिला और वही महिला को सेंटर के अंदर ले गया, जहां डॉ. रकीब अहमद ने महिला का अल्ट्रासाउंड किया। अल्ट्रासाउंड के बाद महिला को बताया गया कि उसके गर्भ में लड़की है। इसके बाद महिला से इशारा मिलने के बाद पीछा कर रही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मार दिया और मौके पर ही धीरज, विनीत, डॉ. रकीब अहमद व डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक के पति मोहम्मद जावेद को मौके पर ही दबोच लिया।