- आंधी के साथ किसी दिन आग बढ़ी तो जंगल क्षेत्र में होगा भारी नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। जिले की ग्राम पंचायत खोरी कला में राजस्थान सीमा के साथ अरावली वन क्षेत्र में अवैध कूड़े-कबाड़ में बार-बार लग रही आग ने पर्यावरण और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र से फेंके गए कूड़े में लगी आग से अरावली के पेड़-पौधे और जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं, जबकि प्रदूषण से स्थानीय लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। लेकिन इसके बाद भी प्रशासन मौन है।
बृहस्पतिवार देर रात किसी ने फिर यहां आग लगा दी। इसने अरावली के काफी क्षेत्र को अपने दायरे में ले लिया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आए दिन ऐसा होने से किसी दिन अरावली को बड़ा नुकसान होने से इंकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों के अनुसार, भिवाड़ी (राजस्थान) से अवैध रूप से फेंका गया कूड़ा-कबाड़ इस समस्या की जड़ है। दावा है कि जानबूझकर कूड़े में आग लगाई जा रही है, जिसमें पंचायत, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिलीभगत शामिल है। दो दिन पहले ऊंची लपटें देखी गईं और गर्मी के कारण कूड़ा स्वतः भी जल रहा है। क्षेत्र में पंचायत और वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जों में कबाड़ गोदाम और एक फ्यूल पंप भी चल रहे हैं, जिससे विस्फोटक हादसे का खतरा बना हुआ है।
जल रहे जीव-जंतु तो नष्ट हो रही हरियाली :
आग से अरावली के हरे-भरे जंगल जल रहे हैं। इससे जीव-जंतुओं को भारी नुकसान हो रहा है। जानकारों का कहना है कि किसी दिन तेज हवा व आंधी में आग लगी तो अरावली में भारी नुकसान कर देगी। समय रहते हुए प्रशासन को इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है और जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही करें।
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क्या कहते हैं लोग :
कूड़े से उठने वाला जहरीला धुआं और बदबू स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर रहा है। स्थानीय निवासी आजाद, हसन व रामपाल ने बताया इधर आगजनी आम बात है। गर्मियों में हर बार आग लगती है, लेकिन प्रशासन कुछ नहीं करता। क्षेत्रवासी बदबू और जहरीले हवा से प्रभावित हैं तो जीव-जंतुओं की हानि भी चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने पंचायत, वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वन विभाग ने दावा किया कि आग वाली जमीन उनकी नहीं है, लेकिन नुकसान का आकलन करने की बात कही।
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क्या कहती हैं सरपंच :
खोरी कला की सरपंच शालिनी से संपर्क नहीं हो सका। नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि क्षेत्र में अवैध कब्जों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। कबाड़ गोदामों में पहले भी बड़ी आगजनी हो चुकी है, और फ्यूल पंप की मौजूदगी खतरे को बढ़ा रही है। जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि अवैध कूड़ा डंपिंग रोकी जाए, कब्जे हटाए जाएं, और कूड़ा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं।
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पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तत्काल कार्रवाई जरूरी है। वृक्षारोपण, ड्रोन निगरानी, और कूड़ा रीसाइक्लिंग जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। स्थानीय निवासी प्रशासन से ठोस कदमों की उम्मीद कर रहे हैं ताकि पर्यावरण और उनकी सेहत की रक्षा हो सके। -
वर्जन
मामला संज्ञान में आया है। अधीन कर्मचारियों को मौके पर निरीक्षण करने के लिए भेजा गया। जिनकी जांच रिपोर्ट के अनुसार जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
आकांक्षा तंवर, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी