- धीरदुका गांव में धरने पर बैठे थे किसान, आईएमटी रोजका मेव में चल रहे निर्माण कार्यों को रोकने की मांग पर अड़े
महिला बेहोश, तीन बसों में भरकर थाने ले गई पुलिस
रिजवान खान
नगीना। मंगलवार को धीरदुका गांव में मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे किसानों और पुलिस का आमना-सामना हो गया। दरअसल किसान आईएमटी रोजका मेव में चल रहे निर्माण कार्यों को रोकने की मांग पर अड़े रहे। वहीं, प्रशासन निर्माण कार्य को चालू कराने की जद्दोजहद करता रहा। सहमति न बन पाने के कारण महिला किसानों ने बुलडोजर पर चढ़ काम को बंद करा दिया। काम को बंद होते देख प्रशासन ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजी तथा हल्का बल प्रयोग किया। जिसमें लाठी लगने से एक महिला बेहोश हो गई। जिससे गुस्साए किसानों ने महिलाओं, बच्चों सहित सैंकड़ों की तादाद में गिरफ्तारी दी। पुलिस ने 55 किसानों को हिरासत में लिया है।
पुलिस किसानों को हिरासत में लेकर हरियाणा रोडवेज की तीन बसों से थाने ले गई। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वह काम नहीं होने देंगे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नूंह हेडक्वार्टर डीएसपी हरेंद्र कुमार ने दल बल के साथ मोर्चा संभाले रखा।
हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) के कर्मचारी सोमवार को भी जेसीबी मशीनें लेकर निर्माण कार्य करने पहुंचे थे। लेकिन किसानों ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीनों पर चढ़कर काम को रोक दिया। किसानों का कहना था कि मांगें पूरी होने के बाद ही काम शुरू होने दिया जाएगा। काफी समझाने के बाद किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे और काम कर रही जेसीबी मशीनों को रुकवाकर उन पर बैठ गए। सोमवार को भी विरोध के दौरान एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई थी जिसे आनन–फानन में अस्पताल पहुंचाया गया।। पुलिस के आला अधिकारी किसानों को समझाते रहे और शांति की अपील की।
जानकारी अनुसार, आईएमटी रोजकामेव के लिए 9 गांव रेवासन, धीरदुका, कंवरसिका, महरोला, रूपाहेड़ी, खेड़ली कंकर, बडेलाकी, रोजकामेव और खोड़ गांव के किसानों की साल 2010 में 1600 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। उस दौरान किसानों की जमीन को सरकार द्वारा 25 लाख रुपये का मुआवजा प्रति एकड़ देकर अधिग्रहण कर लिया गया था।
किसानों ने बताया कि बाद में सरकार ने फरीदाबाद के चंदावली, मच्छगर गांवों की जमीन का भी अधिग्रहण किया। बाद में सरकार ने किसानों से बातचीत करते हुए 46 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की बात कही। किसानों को 21- 21 लाख रुपये दे दिए गए और 25 लाख रुपये बाद में देने को कहा। लेकिन आज तक किसानों को 25-25 लाख रुपये नहीं दिए गए हैं। इसी के चलते किसान धीरदूका गांव में 29 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।