नागरिक अस्पताल में दवा लेने के लिए लगी कतार।
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गुरुग्राम। शहरवासियों पर प्रदूषण की ऐसी मार पड़ी है कि अस्पतालों में सांस और दमा मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। स्थिति यह है कि सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल की चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी ओपीडी में मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। पहले जहां औसतन 40-50 मरीज आते थे, वहीं अब रोजाना आने वाले मरीजों की औसतन संख्या 100 है। प्रदूषण के मामले में पिछले दो दिनों से स्थिति एक जैसी बनी हुई है। इसी क्रम में मंगलवार को भी जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 368 एसपीएम दर्ज किया गया।
एक दिन पहले शहर का समग्र एक्यूआई 369 था। प्रदूषण में बढ़ोतरी के बावजूद शहर की धूलभरी सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इसमें प्रमुख रूप से सोहना रोड, सेक्टर-9, 9ए, सेक्टर-10, फर्रूखनगर रोड, पटौदी रोड समेत अन्य सड़कें शामिल हैं। तापमान में गिरावट व हवाओं की गति मंद पड़ने के कारण धूल के बारीक कण सतह पर ही ठहर रहे हैं, जिसके चलते प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। इन सबके बावजूद पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) की तरफ से लागू किए गए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पालन नहीं हो रहा है।
चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी ओपीडी में बढ़े मरीज
सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वरुण ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने के कारण अस्पताल में मरीजों की संख्या में खासा इजाफा देखने को मिला है। चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी ओपीडी में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। राहत की बात यह है कि अभी मरीजों को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है और सभी मरीजों को उचित इलाज देकर भेजा जा रहा है। तापमान कम होने के कारण सुबह के समय पीएम-2.5, पीएम-10 सरीखे प्रदूषणकारी कण सतह पर ही रहते हैं। इसके चलते लोगों को सुबह सैर से परहेज करने की सलाह दी जा रही है। खास तौर पर पहले से ही सांस व दमा रोग से पीड़ित लोगों को सुबह की सैर से बचने की जरूरत है। इसमें अधिकांश बुजुर्ग शामिल हैं।
सबसे अधिक प्रदूषित रहा ग्वाल पहाड़ी
मंगलवार को वन्य क्षेत्र ग्वाल पहाड़ी इलाके में प्रदूषण सबसे ज्यादा रहा और यहां पर एक्यूआई 388 दर्ज किया गया तो वहीं इस सूची में विकास सदन दूसरे नंबर पर रहा। यहां पर एक्यूआई 374 व सेक्टर-51 में एक्यूआई 342 दर्ज किया गया। हालांकि, प्रदूषण बढ़ने पर अब जाकर अग्निशमन विभाग के द्वारा अब जाकर पेड़-पौधों पर पानी का छिड़काव शुरू किया गया है।