प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण विभाग पर मिलीभगत का लगाया आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। उपमंडल अंतर्गत गांव खोरी खुर्द में एक बार फिर अवैध कबाड़ गोदामों में हानिकारक रसायनयुक्त ड्रम और रबर सामग्री जलाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। रात के अंधेरे में ये धंधा चोरी-छिपे चलाया जा रहा है। इससे न सिर्फ वातावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों का जीना भी मुहाल हो गया है। प्रदूषण का असर वन्यजीवों और फसलों पर भी पड़ रहा है।
इस मामले में अब गांव के ही निवासी उस्मान पुत्र दल्ली ने जिला उपायुक्त को एक शिकायत देकर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों और जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उस्मान का कहना है कि पूर्व में कोर्ट के हस्तक्षेप और मीडिया की रिपोर्टिंग के बाद इन अवैध गोदामों पर कार्रवाई की गई थी और इन्हें सील किया गया था, लेकिन अब ये कारोबारी फिर से सक्रिय हो गए हैं। ये अवैध कारोबारी अब कृषि योग्य भूमि पर रसायनयुक्त कबाड़ जलाने का कार्य कर रहे हैं। यह क्षेत्र राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक नगर से सटा हुआ है, जहां से सस्ते दामों में औद्योगिक कबाड़ मंगवाकर गांव में जलाया जा रहा है।
इस प्रक्रिया में निकलने वाला जहरीला धुआं न सिर्फ सांस की बीमारियों का कारण बन रहा है, बल्कि आस-पास के बच्चों, बुजुर्गों और पशु-पक्षियों को भी खतरे में डाल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुनारी गांव के पास और खोरी खुर्द के आसपास रात के समय भारी धुंआ और बदबू महसूस की जाती है।
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पहले भी हुईं हैं शिकायतें, कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों ने बार-बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पूर्व में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की बात कही गई थी। लेकिन अब यही अवैध गोदाम दोबारा अलग-अलग स्थानों पर किराए की जमीन लेकर चलाए जा रहे हैं। आरोप है कि इन कबाड़ गोदामों में बिना किसी अनुमति के औद्योगिक रसायन और रबर जलाई जा रही है, और उससे बनने वाली शीट दिल्ली-एनसीआर में ऊँचे दामों में बेची जा रही है। जीएसटी चोरी के साथ-साथ यह कारोबार पूरी तरह से अवैध है।
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वर्जन
आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पूर्व में भी कड़ी कार्रवाई की गई थी। फिलहाल भी यदि गांव सुनारी या उसके आसपास ऐसा कोई मामला है तो उसकी जांच कराई जाएगी। इस क्षेत्र में विभाग की एक टीम प्रत्येक 15 दिन में निरीक्षण करने जाती है।
विपिन कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी