कहा - आम नागरिक पांडुलिपियों की जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से कर सकते हैं साझा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भारत सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध परम्परा, सांस्कृतिक धरोहर एवं बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्राचीन पाण्डुलिपियां, ताड़पत्र एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं भावी पीढि़यों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना है।
डीसी उत्तम सिंह ने बताया कि इस मिशन के अंतर्गत गत 16 मार्च 2026 से राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है। इसमें जनभागीदारी के माध्यम से देशभर के परिवारों, मंदिरों एवं संस्थाओं में उपलब्ध पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम् एप’ के जरिए जियो-टैग कर सूचीबद्ध एवं डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। डीसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025-26 के यूनियन बजट में की गई घोषणा अनुरूप द्वारा भारत सरकार ने संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन शुरू किया है, जिसके तहत इन पांडुलिपियों को समय के प्रभाव से बचाने के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मठों, मंदिरों और निजी पुस्तकालयों के प्रबंधकों से संवाद स्थापित कर पांडुलिपियों के संरक्षण में उनका सहयोग लिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संरक्षण कार्य के दौरान मूल दस्तावेजों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि उच्च गुणवत्ता में उनका संग्रहण संभव हो सके। डीसी ने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत लगभग 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से जिले की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने आह्वान किया कि ज्ञान भारतम् मिशन के तहत आम नागरिक भी अपनी पांडुलिपियों की जानकारी मोबाइल एप के माध्यम से साझा कर सकते हैं।