कैब में बैठे लोग किसी से फोन पर बच्चियों को तीन लाख रुपये में बेचने की बात कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन पाई। इस पर महिलाओं ने उमेश से कहा कि अब उन्हें अलवर नहीं जाना। इस पर चालक ने मानेसर अंडरपास से कैब को वापस मोड़ दिया। यह सब बातें सुनकर उमेश समझ चुका था कि कैब में बैठे लोग बच्चा चोरी करके बेचने जा रहे हैं। उसने सतर्कता दिखाते हुए डीएलएफ फेज तीन मेट्रो स्टेशन के पास कुछ सामान लेने की बात कहकर कैब रोकी और नीचे उतरकर पुलिस को सूचना दे दी। थोड़ी देर बाद वह कैब को सीधे डीएलएफ फेज तीन थाने ले गया।
दिल्ली से चोरी की थीं दोनों बच्चियां
आरोपियों ने बताया है कि अपने साथियों के साथ मिलकर वह बच्चों को चोरी करते हैं। जहां अच्छे रुपये मिलते हैं, वहीं उन्हें बेच देते हैं। पूजा और वीणा के सहयोग से उन्होंने दोनों बच्चियां दिल्ली से चोरी की थीं और तीन लाख रुपयों में बेचने का सौदा तय हुआ था।