दिव्यांशु ठाकुर (22) : क्रेडिट कार्ड धारकों का बेचता था डाटा
पूर्व में क्रेडिट कार्ड कंपनी में मैनेजर था। वहीं से क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा चुराकर गिरोह को बेचता था। कुछ दिन पहले नौकरी छोड़ दी और फिर आनंद के साथ मिलकर ठगी का ऑफिस खोल लिया। ठगी की रकम का 50 प्रतिशत हिस्सा वह सरगना आनंद को देता था, जबकि 50 प्रतिशत खुद रखता था। वह बीएससी (पीसीएम) और एमबीए पास है।
सनी कश्यप (23) : फर्जी सेंटर टीम लीडर
फर्जी सेंटर में टीम लीडर के रूप में काम करता था। ऑफिस की देखरेख, फर्जी वॉलेट खाता तैयार करना, ब्रोकर के माध्यम से फर्जी बैंक खातों की व्यवस्था करता था। वह बीएससी कर रहा है।
अंकित यादव (20) : कार्ड धारकों को कॉल करना
15000 रुपये में फर्जी सेंटर में नौकरी करता था, जिसका कार्य क्रेडिट कार्ड धारकों को इंटरनेट कॉल करना होता था। वह 12वीं पास है।
निशांत माथुर (24) : क्रेडिट कार्ड के लिए लोगों को फंसाना
15000 रुपये की नौकरी करता रहा था। इसका काम भी कार्ड धारकों को कॉल कर क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए फंसाना था। 12वीं की पढ़ाई कर चुका है।
एएसपी अभिजीत आर शंकर ने बताया कि गिरोह का सरगना आनंद इंजीनियर है और वही लोगों को ठगने के लिए एप बनाकर विभिन्न लिंक तैयार करता था। इसके बाद शातिर सदस्य उस लिंक को लोगों के फोन पर भेजकर क्लिक करने के लिए झांसा देते थे। जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता था और शातिर अपने हिसाब से खाते की रकम खाते ट्रांसफर कर लेते थे।
चल-अचल संपत्ति की होगी जांच
साहिबाबाद थाना प्रभारी नागेंद्र चौबे ने बताया कि शातिर ठगी के पैसा महंगे मोबाइल और अपने शौक पूरे करने में खर्च कर देते थे। इनकी चल-अचल संपत्ति के बारे में पता किया जा रहा है। शातिरों ने 10 नवंबर 2020 को साहिबाबाद निवासी नीरज शर्मा को इंटरनेट कॉल से क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर लिंक भेजकर एप डाउनलोड कराया और खाते से 29700 रुपये की ठग लिए थे। इसी रकम से शातिरों ने शॉपिंग की और बचे पैसे को अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। पुलिस व साइबर सेल टीम ने वहीं से लिंक लेकर शातिरों को दबोचने में सफलता पाई है।