समय पर 495 करोड़ का भुगतान न करने पर एसएसवीपी ने जब्त की थी राशि
विराट त्यागी
गुरुग्राम। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद एम3एम के मालिक की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। बिल्डर प्रबंधन को जिला अदालत से झटका लगा है। एचएसवीपी द्वारा एम3एम के जब्त किए गए 123 करोड़ रुपये के खिलाफ दायर कंपनी की याचिका को अदालत ने रद्द कर दिया है। यह आदेश महावीर सिंह अपर जिला न्यायाधीश सह पीठासीन न्यायाधीश विशिष्ट वाणिज्यिक न्यायालय की अदालत ने दिया है। एम3एम कंपनी की तरफ से तय समय पर एचएसवीपी को 371 करोड़ रुपये न देने पर विभाग ने आवंटन रद्द करते हुए 123 करोड़ रुपये जब्त कर लिए थे।
एचएसवीपी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विवेक वर्मा ने बताया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की तरफ से 28 मार्च 2022 में सेक्टर-43 में 3.54 एकड़ कॉर्मिश्यल के लिए ई-ऑक्शन करने का विज्ञापन दिया गया था। 31 मार्च को विभाग की तरफ से ई-ऑक्शन किया गया था। इसमें एम3एम की लेख बिल्डटेक कंपनी ने 495 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी।
कंपनी की तरफ से पहले ही 10 प्रतिशत की राशि ई-ऑक्शन से पहले ही जमा करा दी गई । इसके बाद कंपनी ने 15 प्रतिशत राशि जमा करते हुए कुल 123.77 करोड़ रुपये जमा करा दिए थे। 19 मई 2023 को एचएसवीपी और कंपनी के बीच करार हो गया था। कंपनी को (लेटर ऑफ इंटेंट ) जारी कर दिया गया। दोनों के बीच में हुए करार में तय था कि अगर कंपनी करार होने 120 दिनों में जमीन की 371 करोड़ रुपये (75 प्रतिशत) राशि जमा नहीं करती है तो उनका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। कंपनी ने 123 दिन तक राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद विभाग की तरफ से राशि का भुगतान करने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया। इसके बावजूद कंपनी की तरफ से पैसे जमा नहीं कराए गए। 15 अक्तूबर 2022 को विभाग की तरफ से तय नियमों के चलते आवंटन रद्द करते हुए कंपनी के 123 करोड़ रुपये जब्त कर लिए गए। इसके बाद 19 नवंबर 2022 को एम3एम की कंपनी लेख बिल्डटेक की तरफ से अदालत में याचिका दायर करते हुए दलील दी गई कि उन्होंने जो कॉमर्शिलय जमीन ( 3.54 एकड़ ) ली हैए उसकी 2022 की नई ई-ऑक्शन के तहत राशि जमा करनी थी। नई पॉलिसी के तहत वह तीन साल में (प्रत्येक साल में दो बार ) राशि का भुगतान कर सकते हैं इसलिए उनका आवंटन रद्द न किया जाए।
एचएसवीपी के अधिवक्ता विवेक वर्मा ने कंपनी की दलील का विरोध करते हुए कहा कि नई पॉलिसी की तहत कंपनी का ऑक्शन नहीं हुआ था। विभाग और कंपनी के बीच हुए करार के तहत कंपनी को 120 दिन के अंदर 371 करोड़ रुपये जमा कराने थे, लेकिन उन्होंने नहीं कराए। इसके साथ ही अदालत में आवंटन रद्द होने के एक महीने बाद याचिका दायर की गई। अदालत ने एचएसवीपी की तरफ से जब्त किए गए 123 करोड़ रुपये के फैसले को सही ठहराते हुए कंपनी की याचिका रद्द कर दी है। संवाद