गुरुग्राम। साइबर सिटी में 24 हजार फ्लैटों के निर्माण की रफ्तार धीमी है। यह खुलासा सीनियर कंट्री एवं टाउन प्लानिंग विभाग में हुई समीक्षा बैठक में हुआ। उसी दौरान ढाई हजार से अधिक फ्लैटों का निर्माण करने वाली चार कंस्ट्रक्शन कंपनियों को नोटिस जारी किए गए। जिनमें उन्हें निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। वहीं दूसरी ओर कंस्ट्रक्शन कंपनियां तर्क दे रहीं हैं कि एक साल तो कोरोना के कारण निर्माण बंद रहा, अब शुरुआत कर रहे हैं तो रॉ मैटेरियल की कीमत में 10 फीसदी से अधिक का इजाफा हो गया। जिसके कारण पूरा बजट गड़बड़ा गया है।
इस तर्क को देकर कुछ कंस्ट्रक्शन कंपनियां फ्लैट की कीमत बढ़ाने की सोच रहीं हैं। जबकि कंट्री एवं टाउन प्लानिंग विभाग तथा हरेरा उनके इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं है। हरेरा का तर्क है कि एग्रीमेंट के समय जो रेट तय हुए थे, वही फाइनल होंगे। इन रेटों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होगा। साथ ही अब हरेरा का एक और नया आदेश है, जिसमें कहा है कि फ्लैट के बाहरी हिस्से को कवर्ड एरिया में शामिल नहीं किया जा सकेगा।
कंस्ट्रक्शन कंपनियों की मानें तो कोरोना की दूसरी लहर के बाद कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। इनमें खासकर सीमेंट, स्टील, गिट्टी, सरिया महंगा है। इस साल के वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के दौरान पैन इंडिया बेसिस पर सीमेंट की कीमतों में लगभग 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उत्तर और मध्य भारत में सीमेंट की कीमत तिमाही दर तिमाही 3 से 4 फीसदी बढ़ी हैं। इन सब में बढ़ोतरी का असर रियल एस्टेट डेवलपर्स पर सीधा पड़ा है। जिसकी वजह से रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए आज असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निर्माणाधीन फ्लैट की कीमतों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता हैं। क्योंकि मैटेरियल की बढ़ोतरी से 5000 वर्ग फुट से कम के प्रोजेक्टों की कीमतों में 5 फीसदी की वृद्धि होगी। या फिर सरकार की तरफ से कुछ ऐसे प्रयास करने चाहिए जिससे कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की वृद्धि में थोड़ी सहूलियत मिल सके।
कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की वृद्धि का एक और कारण बड़े-बड़े मैटेरियल सप्लायर अप्रैल से जून की तिमाही में मैटेरियल को होल्ड कर लेते हैं। वे जानते हैं कि बरसात के महीनों काम में कमी और मैटेरियल के खराब होने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार को जमाखोरी पर सख्त कदम उठाना चाहिए। इनका कहना है कि अफॉर्डेबल हाउसिंग (गरीबों को आवास) स्कीम के तहत कीमतें बढ़ने पर मार्जिन बहुत कम है। लेकिन इनपुट टैक्स के माध्यम से इनकी भरपाई हो जाती है।
जारी हुए नोटिस
कंट्री एवं टाउन प्लानिंग विभाग के सीनियर टाउन प्लानर संजीव मान ने बताया कि जिले में 40 डवलपर की ओर से करीब 24 हजार फ्लैटों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से ओशियन-7, माहिरा, बदरेवाल तथा अरेरा कंस्ट्रक्शन कंपनी के फ्लैटों के निर्माण की स्पीड काफी धीमी है। समीक्षा के बाद इनको नोटिस जारी करके निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं ताकि वह समय से लोगों को फ्लैट उपलब्ध करा सकें। उनका यह भी कहना है कि एग्रीमेंट से ज्यादा राशि फ्लैट की नहीं ली जा सकती।
ये कहना है कंस्ट्रक्शन कंपनियों का
एक तो कोरोना के कारण एक साल काम प्रभावित हुआ। दूसरे कंस्ट्रक्शन मैटेरियल की लागत में नाटकीय ढंग से बढ़ोतरी ने रियल एस्टेट कारोबार को दोहरा झटका दिया है।
प्रदीप अग्रवाल, चेयरमैन एसोचैम नेशनल कॉउंसिल ऑन रियल एस्टेट
सरकार को रॉ मेटेरियल की लागत कम करने के बारे में प्रयास करना चाहिए। तभी कोरोना काल के बाद रियल एस्टेट कारोबार को राहत मिलेगी। अन्यथा लागत बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
नयन रहेजा, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रहेजा डेवलपर्स