गुरुग्राम। टाटा रियल्टी कंपनी ने अपने यहां नौकरी करने वाले उप महाप्रबंधक पर साजिश के तहत फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। कंपनी का कहना है कि आरोपी ने वेंडरों से अधिक दर पर कोटेशन ली और उनसे लाखों रुपये की अवैध वसूली की। इससे कंपनी को काफी आर्थिक नुकसान हुआ जबकि आरोपी को फायदा पहुंचा। ऐसा कर उसने कंपनी के कोड ऑफ कंडक्ट को तोड़ने के साथ ही धोखा किया है। शिकायत पर प्राथमिक जांच के बाद बादशाहपुर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार टाटा रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी की ओर से यह शिकायत संजना मग्गू ने दी है। ठगी का आरोप कंपनी ने अपने यहां कार्यरत डीजीएम करुण सिंह व अन्य अज्ञात पर लगाया है। कंपनी का गुड़गांव के सेक्टर-48 में विपुल ट्रेड सेंटर में भी ऑफिस है। आरोपी को डिप्टी जनरल मैनेजर कॉरपोरेट रिलेशंस के पद पर 11 अप्रैल 2011 को रखा गया था। कंपनी ने उसे नॉर्थ रीजन हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व हिमाचल प्रदेश में वर्किंग की जिम्मेदारी दी थी। उसकी जिम्मेदारी थी कि फंसे हुए प्रोजेक्ट को जल्द पूरा कराए। प्रोजेक्ट के बजट में ही काम पूरा हो। प्रोजेक्ट के दस्तावेज तय समय में पूरे हों और उन्हें संबंधित विभाग या अथॉरिटी से अप्रूवल मिले। उसे ये सभी काम टाटा कोड ऑफ कंडक्ट के तहत करने थे जिसमें कंपनी घूसखोरी के लिए जीरो टोलरेंस पॉलिसी रखती है। उसके खिलाफ 30 सितंबर 2019 को पहली शिकायत कंपनी के वेंडर महेश यादव ने दी है जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपित ने उसे टेंडर दिलाने के लिए रिश्वत की मांग की है और रुपये न देने पर काम नहीं देने को कहा है।
आरोपी ने कहा कि 20 से 30 प्रतिशत अधिक रेट की बिड लगाओ लेकिन वेंडर ने ऐसा नहीं किया। आरोपी के खिलाफ ऑडियो रिकॉर्डिंग व ईमेल के सबूत भी कंपनी को मिले। कंपनी ने मामला सामने आने पर जांच बैठाई तो आरोप सही पाए गए। आरोपी ने मैसर्स मोनार्च डिजाइन स्टूडियो व अर्बन इंफ्राटेक डिजाइन नाम से दो कंपनियां बनाई जो एक ही पते पर रजिस्टर्ड थीं। आरोपी ही अर्बन इंफ्राटेक डिजायन कंपनी में एमडी पाया गया। आरोपी ने जुलाई 2019 में अपनी मां कमलेश कुमारी के खाते में 3 लाख 25 हजार और अगस्त 2019 में अपने पिता अजीत सिंह के खाते में 5 लाख 78 हजार रुपये ट्रांसफर कराए। इसी तरह कई अन्य वेंडरों से उसने रुपये लिए थे। बादशाहपुर थाना प्रभारी दिनकर ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।