थपकी देकर गोद में अपने बच्चे को सुलाने का प्रयास करती मां, सड़क पर अपने मासूम भाई की अंगुली पकड़ टहलती बहन और पार्कों में हादसे से अनजान खेल में मस्त बचपन। चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के बाहर कुछ ऐसा नजारा है। ढाई करोड़ का फ्लैट होने के बाद भी लोग ठंड में सड़क पर रहने को मजबूर हैं।
हादसे के बाद गुरुवार को ही देर रात सोसाइटी को खाली करा लिया गया था, लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी लोगों के लिए प्रशासन और बिल्डर की ओर से रहने की कई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। भूखे-प्यासे लोग सड़कों और पार्कों में टहल कर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।
एक तरफ जहां लोग लगातार बिल्डर और डीटीपी के अधिकारियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं तो दूसरी ओर प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने पर आक्रोशित हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन और एनडीआरएफ ने सोसाइटी को खाली करा लिया, खतरे के बीच वो भी सोसाइटी के अंदर नहीं रहना चाहते। ऐसे में उनके लिए कोई व्यवस्था तो होनी ही चाहिए।
शासन की ओर से लोगों को खाने-पीने का सामान भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के प्रवक्ता वरुण धमीजा के अनुसार दो रात और दो दिन बीत गए, उनके बच्चे तक चैन से नहीं सो पा रहे हैं। अब तो पूरे टावर के फ्लैटों में दरार आ गई है, ऐसे में वो अपने फ्लैटों में नहीं घुस सकते। प्रशासन को महिलाओं को बच्चों को ख्याल करते हुए कम से कम उनके लिए तो व्यवस्था करनी ही चाहिए।
सोनम अरोड़ा ने कहा कि हादसे के बाद पूरा टावर खाली कराने का अंदेशा था। इसी दौरान वैकल्पिक व्यवस्था कर दी जानी चाहिए थी। दो दिन से बगैर कुछ खाए लोग सड़कों पर बैठे हैं। यहां तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं, बावजूद इसके कोई व्यवस्था नहीं की जा रही।
सोसाइटी के सुरक्षित हिस्से में 35 फ्लैट खुलवाए गए हैं। वहां लोगों के रहने की व्यवस्था कर दी गई है। कैंटीन में खाने-पीने सुविधा दी जा रही है। अभी तक उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है, अगर किसी को परेशानी हो रही है या रहने का स्थान नहीं मिला है तो उनसे सीधे संपर्क कर सकता है, लोगों को सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
- अंकिता चौधरी, एसडीएम, गुरुग्राम।