गुरुग्राम। पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली-एनसीआर में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने की बड़ी तैयारी की है। इस कड़ी में यहां हवा को शुद्ध करने के साथ ही पराली प्रबंधन की योजना का खाका तैयार कर लिया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अमर उजाला के साथ सीधा संवाद कर पर्यावरण प्रदूषण रोकने की तैयारियां साझा की। दो दिन पहले अपने पैतृक गांव जमालपुर पहुंचे भूपेंद्र यादव ने माना कि एनसीआर के लिए पर्यावरण प्रदूषण बड़ी समस्या है। इसे रोकने के लिए धरातल पर काम शुरू कर दिया गया है, जल्द ही सकारात्मक परिणाम सबके सामने होगा। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में प्यूरीफाइंग टॉवर या स्मॉग टॉवर लगाए जाएंगे। फिलहाल दिल्ली में प्रयोगिक तौर पर दो टॉवर लगाए गए हैं। इस प्रयोग के सफल परीक्षण के बाद दिल्ली के अन्य हिस्सों सहित एनसीआर के सभी शहरों में यह तकनीक प्रयोग में लाई जाएगी। फिलहाल आईआईटी मुंबई और दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम इसके परीक्षण पर नजर रखे है।
उन्होंने बताया कि पराली से दिल्ली-एनसीआर की हवा ज्यादा प्रदूषित होती है, इसलिए ऐसे बंदोबस्त किए गए हैं कि पराली जलाने की नौबत न आए। पराली से बायोफ्यूल बनाने पर काम हो रहा है। नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसीएल) में 20 मिलियन टन बायोफ्यूल की खपत होती है।साथ ही पराली का डिकंपोजिशन भी किया जा रहा है। इस साल दिल्ली के 40 हजार हेक्टेयर, हरियाणा के एक लाख और यूपी के 6 लाख 70 हजार हेक्टेयर में डिकंपोजिशन की लक्ष्य रखा गया है।
बेहतर कर रही है हरियाणा सरकार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस दिशा में हरियाणा सरकार बेहतर कार्य कर रही है। धान जैसी फसल की बुआई नियंत्रित करने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत जैसी योजना चलाई। गुरुग्राम जैसे शहर में ई व्हीकल जोन बनाया गया। जिसमें इलेक्ट्रिक ऑटो चलाने पर काम हो रहा है। फिलहाल यहां एक जोन बनाया गया। पूरे शहर से डीजल ऑटो खत्म होंगे, तो प्रदूषण में कमी आएगी। यह भी प्रयोग के तौर पर है। अगर प्रयोग सफल रहा तो पूरे एनसीआर में इसे भी लागू किया जाएगा।