गुरुग्राम (मनोज कुमार)। नेपाल स्थित घर से नाराज होकर भारत आई एक किशोरी गुरुग्राम में दुकान से सामान खरीदते मिली। किशोरी के गुरुगाम में होने के अनुमान के चलते माता-पिता ने दिल्ली स्थित नेपाल एंबेसी से संपर्क किया तो एंबेसी ने उसे तलाशने के लिए हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट से मदद मांगी। बहरहाल, पुलिस ने लड़की को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया है।
नेपाल के मोरंग निवासी चाय की गुमटी लगाने वाले दंपती की 16 वर्षीय बेटी चार माह पहले डांट से नाराज होकर घर से निकल गई थी। नेपाल-भारत सीमा को पार कर वह बिहार आ गई। यहां वह किराए पर कमरा लेकर रही। वहां एक महिला ने उसे अपने अनुसार चलने के निर्देेश दिए तो वह वहां से दिल्ली होते हुए गुरुग्राम की ओर आ गई। इस बीच किशोरी के माता-पिता उसे तलाशने के प्रयास करते रहे। उसके मोबाइल फोन से पता चला कि उनकी बेटी भारत में है। कुछ समय बाद जानकारी मिली कि वह गुरुग्राम में है। माता-पिता ने नेपाल एंबेसी में संपर्क कर लड़की को तलाशने की गुहार लगाई। एंबेसी ने गुरुग्राम में सेक्टर-51 स्थित स्टेट क्राइम ब्रांच की शाखा में संपर्क किया। यहां स्टेट क्राइम ब्रांच शाखा में तैनात व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुनील अपनी टीम के साथ उसे तलाशने में जुट गए।
सेक्टर-50 में मिली लोकेशन
इंस्पेक्टर सुनील ने बताया कि किशोरी के फोन की लोकेशन से उसे तलाशने में आखिरकार कामयाबी हासिल हो ही गई। वह सेक्टर-50 में एक दुकान पर सामान खरीद रही थी। हालांकि, फोटो और उसके वास्तविक चेहरे में जमीन-आसमान का अंतर था। एक बार तो असमंजस पैदा हो गया। उसके पिता व मामा को बुलाया गया।
उन्होंने किशोरी को पहचान लिया। बिहार से गुरुग्राम तक वह कैसे आ गई। इसके पीछे किसका हाथ है, आदि सवालों पर किशोरी ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। वह यही कह रही है कि भारत में वह जहां-जहां भी रही, सुरक्षित रही। माता-पिता अपनी बेटी को पाकर खुश हैं। उन्होंने अभी तक मामला दर्ज नहीं कराया है। वहीं, नेपाल एंबेसी व केन नेपाल संस्था ने स्टेट क्राइम ब्रांच पुलिस का शुक्रिया अदा किया है। (संवाद)