- फ्लैट के बदले में उसी तरह का दूसरा फ्लैट उसी इलाके में मिले
- फ्लैट तोड़ा जाए तो उसकी जगह दूसरा नया फ्लैट दिया जाए
- फ्लैट सहित अंदरूनी डेकोरेशन का मूल्यांकन कर भुगतान हो
अब तक के मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं
जिला नगर योजनाकार विभाग की ओर से फ्लैट और उसके डेकोरेशन का मूल्यांकन किया गया था। प्रशासन की मूल्यांकन करने वाली टीम भी तीन बार मूल्यांकन कर चुकी है, लेकिन पीड़ित पक्ष उससे संतुष्ट नहीं है।
10 फरवरी 2022 को सोसाइटी के डी टावर की छठवीं मंजिल में काम हो रहा था। इसी दौरान वहां का फर्श टूट कर नीचे की पहली मंजिल तक गिरता चला गया। हादसे की पुलिस रिपोर्ट दर्ज हुई। जिला प्रशासन ने एसआईटी गठित कर की जांच शुरू की। आईआईटी दिल्ली की टीम ने संरचनात्मक जांच की। इसके बाद इस टावर को पूरी तरह से असुरक्षित करार दिया गया।
जांच में निर्माण कार्य और सामग्री दोनों घटिया मिले
आईआईटी दिल्ली की टीम ने मार्च में यहां जांच शुरू की थी। इसमें पाया गया कि भूजल में क्लोराइड की मात्रा अपेक्षाकृत बहुत अधिक है, जिससे सरिया कमजोर हो रहा है। हादसे के बाद बिखरे मलबे में सरिया का व्यास बहुत कम मिला। सरिया में जंग लगा था। सीमेंट और अन्य सामग्री भी घटिया था। सरिया और सीमेंट की लैब की जांच कराई गई।
हादसे की एक वजह ये भी थी
डी टॉवर की छठवीं मंजिल के जिस फ्लैट पर काम चल रहा था, वहां पर जरूरी तकनीकी एहतियात नहीं बरता गया। उस मंजिल में प्रयोग हुआ सरिया और निर्माण सामग्री पहले से ही घटिया थी, इसलिए फर्श भूतल तक गिरता ही चला गया।
वर्ष 2017 में चिनटेल्स सोसाइटी बसी थी। यहां ए, बी, सी, डी, ई, एफ, जी, एच और जे सहित नौ टॉवर बने हैं। जिसमें 532 फ्लैट बने हैं। एक फ्लैट की औसत कीमत लगभग दो करोड़ रुपये है। यहां वर्तमान में 350 परिवार रह रहे हैं। यह सोसाइटी द्वारका एक्सप्रेसवे के ठीक पास है, इसलिए ये पूरा इलाका तेजी से विकसित हो रहा है।
अब तक पांच को मिला मुआवजा
डी टावर में हुए हादसे के बाद दुर्घटना का शिकार हुए अरुण श्रीवास्तव के परिवार को 3.5 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। इस घटना में अरुण की पत्नी की जान चली गई थी। उनके साथ चार और परिवारों को भी मुआवजा मिल चुका है। डी टावर को तो ध्वस्त करने के आदेश हो चुके हैं। जबकि ई और एफ की पूरी तरह सुरक्षा जांच कराने की बात प्रशासन ने कही है।
गुरुग्राम के चिनटेल्स हादसे के मामले में अब बिल्डर ने टावरों की सुरक्षा जांच के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की (सीबीआरआई) का दरवाजा खटखटाया है और तब तक प्रशासन से टावर के ध्वस्त करने की कार्यवाही को स्थगित करने का अनुरोध किया है। बिल्डर की ओर से कहा गया है कि हमें अभी भी आईआईटी दिल्ली के माध्यम से एसआईटी द्वारा किए गए ऑडिट के वास्तविक प्रयोगशाला परीक्षण के परिणाम प्रदान नहीं किए गए हैं।
बिल्डर दे रहा है प्रभावित परिवारों का किराया
10 फरवरी, 2022 की घटना के तुरंत बाद प्रभावित परिवारों को स्थानांतरित किया। उसके बाद से लगभग 50 परिवारों का किराया दिया जा रहा है। औसत किराया लगभग र 40,000 रुपये प्रति माह प्रति अपार्टमेंट, जो अब तक भी दिया जा रहा है।