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गुरुग्राम से दूसरे शहरों में पलायन की तैयारी में 500 आईटी कंपनियां

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गुरुग्राम। हरियाणा के युवाओं को प्राइवेट कंपनियों में 75 फीसदी आरक्षण का कानून गुरुग्राम की 500 से अधिक आईटी कंपनियों के सामने मुसीबत बन सकता है। ये कंपनियां इस कानून के बनने के बाद से नोएडा या फिर किसी अन्य शहर में शिफ्ट हो सकती है। यह खुलासा नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी (नैसकॉम) के सर्वे में हुआ है। कंपनी ने 93 कंपनियों के प्रबंधन और स्टाफ से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।
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नैसकॉम देश में 180 मिलियन डॉलर के आईटी बीपीएम उद्योग के लिए उच्च स्तरीय संस्था है। यह संस्था देश के जीडीपी, निर्यात, रोजगार बुनियादी ढांचे और वैश्विक दृश्यता में योगदान करती है। इस संस्था की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा के युवाओं को प्राइवेट नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण का कानून गुरुग्राम की 500 से अधिक आईटी कंपनी के लिए ठीक नहीं है। इस बारे में नैसकॉम ने गुरुग्राम की आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र की 73 कंपनियों का सर्वे किया था। जिसमें प्रबंधन के साथ-साथ विशेषज्ञ और सभी श्रेणी के 80 फीसदी कर्मचारी शामिल थे। ये कंपनियां 1.4 लाख युवाओं को रोजगार देेने वाली हैं। इनके प्रबंधन और काम करने वालों ने कहा है कि यह कानून कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों के भविष्य के लिए भी चिंताजनक है। जिसका एक-दो साल में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही क्षेत्र के निवेश के लिए भी ठीक नहीं होगा।
व्यवहारिक नहीं है कानू
नकंपनियों ने सर्वे के दौरान स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार का 75 फीसदी स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाला कानून व्यवहारिक नहीं हैं। और यहां पर भविष्य भी नहीं है। इसके लागू होने से विश्व स्तर पर गुरुग्राम की जो छवि बनी हुई है, उस पर भी विपरीत असर पड़ेगा। इसलिए ऐसे राज्य और शहर का चयन करना है, जहां पर कंपनियों और उनमें काम करने वालों का भविष्य हो। कंपनियों ने यह भी कहा कि गुरुग्राम आईटी उद्योग के अलावा बहुराष्ट्रीय कंपनियों, ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप जैसी इंडस्ट्री का हब भी है।
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डेढ़ लाख नौकरियों पर पड़ेगा असर
हरियाणा में स्थापित आईटी और आईटीईएस उद्योग में चार लाख लोग काम करते हैं। सर्वे के अनुसार नया कानून लागू करीब डेढ़ लाख नौकरियों को प्रभावित करेगा। इन कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार यहां पर करीब 81 फीसदी कर्मचारी दूसरे राज्यों का है। जोकि पूरी तरह से विशेषज्ञ हैं, इनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों को रखा गया तो आईटी सेक्टर की इंडस्ट्री की क्षमता के साथ-साथ ग्रोथ में कमी होगी। ऐसे में कंपनियां भविष्य को देखते हुए नोएडा सहित दूसरे राज्यों के शहरों में विकल्प तलाश रहीं हैं।
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