विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में कटाई का आंकड़ा बढ़ा, पहले आधी थी संख्या
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा/ ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले प्रस्तावित नमो भारत एवं मेट्रो कॉरिडोर की तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में पेड़ों की कटाई का आंकड़ा बढ़ गया है। पहले केवल नमो भारत कॉरिडोर की बनी डीपीआर में 5,655 पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया था। अब नमो भारत और मेट्रो कॉरिडोर की डीपीआर में यह संख्या बढ़कर 10,504 हो गई है यानी रिपोर्ट में 4,849 अधिक पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
परियोजना के एलाइनमेंट, स्टेशन और डिपो क्षेत्रों के साथ स्टेशनों के प्रवेश-निकास और मल्टीमॉडल एकीकरण क्षेत्रों में इन पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान है। डीपीआर में पेड़ों की कटाई को कम से कम रखने और नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूरक पौधरोपण की योजना भी शामिल की गई है। नमो भारत कॉरिडोर एवं मेट्रो की डीपीआर के अनुसार, कॉरिडोर के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू), एलाइनमेंट, स्टेशन और डिपो क्षेत्रों में 9,178 पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित स्टेशनों के प्रवेश-निकास और मल्टीमॉडल एकीकरण क्षेत्रों में 1,326 पेड़ प्रभावित हो सकते हैं। इस तरह कुल 10,504 पेड़ों को हटाने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने की जरूरत पड़ सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई को कम से कम रखने का प्रयास किया जाएगा और केवल उन्हीं पेड़ों को हटाया जाएगा, जो परियोजना के निर्माण कार्य से सीधे प्रभावित होंगे। यह प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार पूरी की जाएगी। नमो भारत कॉरिडोर एवं मेट्रो में अब मेट्रो स्टेशन और नमो भारत के स्टेशन बनेंगे। अब नमो भारत काॅरिडोर पर मेट्रो संचालन किया जाना है। एनसीआरटीसी ने संबंधित विभागों को परियोजना की डीपीआर दी हुईं है।
हर पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने की योजना
नमो भारत व मेट्रो कॉरिडोर के राइट ऑफ वे और स्टेशनों के प्रवेश-निकास क्षेत्रों में कुल 10,504 पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका है। पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए प्रत्येक प्रभावित पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने का प्रस्ताव है। इस हिसाब से कुल 1,05,040 पौधे लगाए जाएंगे। पौधरोपण और पांच वर्षों तक उनकी देखभाल के लिए 47.15 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। प्रति पौधा 4,489 रुपये की लागत के आधार पर यह राशि तय की गई है। परियोजना क्षेत्र में नीम, अशोक, पीपल, नीलगिरी, कीकर, जामुन, शीशम, बकैन, गुलमोहर और बबूल समेत कई प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं।