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ग्राउंड रिपोर्ट: आंखों के आंसू सूख गए, शरीर में कोई थकान नहीं...कोरोना को घुटने टेकने ही होंगे

Sun, 19 Apr 2020 03:29 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजला नेटवर्क, नई दिल्ली
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अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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जहां देखो वहां सिर्फ एक ही बात, एक ही विषय, एक ही विचार और एक ही सवाल, क्या हम कोरोना से जीतेंगे? तो ऐसे में अगर पूरे यकीन से आपसे कहा जाए, हां हम जीतेंगे...तो तत्काल ही दूसरा सवाल होगा, कैसे? इस सवाल के उत्तर में आपको हम कुछ ऐसे लोगों से मिलाने वाले है। जिनके बारे में जानने के बाद आपके जहन में, कैसे जीतेंगे के लिए कोई जगह नहीं रह जाएगी।

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एक पिता द्वारा अपने नवजात बेटे की मौत पर पत्नी को गले न लगा पाना और अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए ड्यूटी पर चले जाना। एक डॉक्टर जो 24 घंटे कोरोना के संक्रमितों के इलाज में लगा रहा है जबकि उसकी मां को उसकी बहुत जरूरत है। एक मां जो अपने दो साल के बच्चे की आंखों में आंखे डालकर यह समझा रही है कि बेटा आज मेरी जरूरत तुमसे ज्यादा देश को है। ऐसे ही कर्मवीर और देशभक्त लोगों के बारे में अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट...    

नवजात बेटे की मौत पर पत्नी को गले तक नहीं लगा पाया, लौटा ड्यूटी पर
कोरोना वायरस के खिलाफ छिड़ी जंग में हर शख्स अपनी भूमिका निभा रहा है, लेकिन पुलिस विभाग में तैनात कांस्टेबल अर्जुन ने ड्यूटी के लिए त्याग की मिसाल पेश की है। पिछले कई दिनों से वह घर नहीं गए। यहां तक कि बेटे की मृत्यु होने पर भी कुछ देर के लिए मिट्टी डालने की रस्म निभाने घर पहुंचे और फिर नाहन (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) लौट आए। इस दौरान परिजनों से भी अर्जुन ने दूर से ही बात की।  आगे पढ़े...
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कोरोना से लोगों को बचाने के लिए दिन-रात जुटे 'योद्धा', बीमार मां को देखने तक का नहीं है वक्त
आगरा में कोरोना वायरस के 172 मरीज अब तक मिल चुके हैं। शहर के साथ-साथ देहात क्षेत्र में भी संक्रमित मिलने से चिकित्सकों की ड्यूटी और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। आगरा के जिला अस्पताल में तैनात नोडल ऑफिसर की तारीफ खुद उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य कर चुके हैं। वहीं सेहत के प्रहरी संक्रमितों की सेवा करने में जुटे हैं। अपने परिजनों को देखने का भी वक्त उनके पास नहीं है। आगे पढ़े...

Dr. Mridul Sharma - फोटो : अमर उजाला
11 माह के बच्चे को घर छोड़ अस्पताल में डटी हैं डॉ. मृदुल शर्मा
अपने बच्चों और परिवार से दूर रहकर महिला चिकित्सक हिमाचल के ऊना जिले के संतोषगढ़ नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवाएं दे रही हैं। संतोषगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक के पद पर तैनात डॉ. मृदुल शर्मा अपने 11 माह के बच्चे को घर में किसी के पास छोड़कर अस्पताल में आने वाले मरीजों की सेवा में लगी हैं। इतना ही नहीं बच्चा किसी तरह के संक्रमण की चपेट में न आए, इसलिए डॉ. मृदुल ने खुद के लिए संतोषगढ़ में ही किराये पर एक कमरा ले रखा है। आगे पढ़े...

दो वर्षीय बच्चे को घर छोड़ मरीजों की सेवा में जुटीं नर्स भारती
अपने परिवार से दूर रहकर कोरोना पीड़ितों और संदिग्ध मरीजों की सेवा में एक योद्धा की तरह डॉक्टर, नर्सें, अस्पतालों का स्टाफ, पुलिस कर्मचारी लगे हैं। देश इन कोरोना कर्मवीरों के आगे नतमस्तक है। ऐसी ही एक कोरोना कर्मवीर स्टाफ नर्स नेरचौक मेडिकल कॉलेज में तैनात है, जो अपने दो वर्षीय बच्चे को घर में पति के पास अकेला छोड़ कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगी हैं। आगे पढ़े...
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डॉक्टर एसके सिंह - फोटो : अमर उजाला
बीमार पत्नी से दूर हैं डॉक्टर एसके सिंह, बखूबी निभा रहे अपना फर्ज
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में सीएचसी प्रभारी खतौली डॉक्टर एसके सिंह अपने फर्ज को बखूबी अंजाम देने में लगे हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एक अच्छे योद्धा की तरह अपने फर्ज को निभा रहे हैं। उनकी पत्नी डॉक्टर रुचि बाल रोग विशेषज्ञ राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में हैं। बताया गया कि लॉकडाउन से पहले सड़क दुर्घटना में डॉक्टर रुचि की पैर की हड्डी कई जगह से टूट गई। उनका देहरादून ही ऑपरेशन कराया गया। आगे पढ़े...

पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात, घर में पत्नियां बना रहीं मास्क 
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से लोगों को बचाने के लिए पुलिसकर्मी सड़कों पर उतरकर अपनी ड्यूटी के साथ ही लोगों को जागरूक कर रहे हैं तो उनकी पत्नियां घरों में मास्क तैयार कर रहीं हैं। इन मास्कों को पुलिसकर्मियों और आम जनता को दिया जा रहा है। ये महिलाएं दो परत वाले मास्क तैयार कर रहीं हैं। दिलचस्प बात है कि कुछ महिला कांस्टेबल ड्यूटी करने के बाद इन महिलाओं का मास्क बनाने में हाथ भी बंटा रहीं हैं। आगे पढ़े...
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