राजधानी के स्कूल में स्पेशल एजुकेशन टीचर (सेट) की भारी कमी के बावजूद पुरुष उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट नहीं देने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है।
हाईकोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि आयु अधिक होने के कारण कई उम्मीदवारों ने नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं किया। इसके मद्देनजर सरकार को नए सिरे से भर्ती का आवेदन जारी करने और उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट देने का निर्देश दिया है। इन टीचरों की नियुक्ति विशेष क्षमता वाले विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए की जाती है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी स्कूलों में योग्य विशेष अध्यापकों की भारी कमी है। इसलिए शैक्षिक योग्यता व मेरिट को तवज्जो दी जानी चाहिए और योग्य उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट दी जानी चाहिए।
खंडपीठ ने यह प्रतिक्रिया एक उम्मीदवार सैयद मेहंदी की याचिका का निपटारा करते हुए दी है। अदालत ने याची को आयु सीमा में छूट देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा सरकार चार सप्ताह में आदेश का पालन करे।
इससे पहले सरकार ने कोर्ट के कहने के बाद भी दो बार यह छूट नहीं दी। अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार के सितंबर 2014 व फवरी 2019 के आदेशों को खारिज कर दिया है।
सरकार ने इन आदेशों में कहा था कि जब मेहंदी ने इस नौकरी के लिए 2009 में आवेदन किया था उस समय ही उसकी आयु अधिकतम सीमा से अधिक थी। उसे इससे छूट प्रदान नहीं की गई थी। हालांकि, सरकार ने महिला उम्मीदवारों को 10 साल की छूट प्रदान की है।