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बैक फुट पर सरकार, जनता को असुविधा हो ऐसा कुछ नहीं करेंगे

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प्रदूषण से निपटने के लिए सम-विषम रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहनों को डे वाइज चलाने के फैसले को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वापस लेने का भी संकेत दिया है। शनिवार को एक कार्यक्रम में केजरीवाल ने कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं करेंगे, जिससे आम लोगों को असुविधा हो।
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हम इसे लागू करने से पहले सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहे हैं। अगर इससे ज्यादा परेशानी हुई तो हम इसे रोक देंगे। केजरीवाल ने इस कार्यक्रम में प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए दूसरे कदम की भी जानकारी दी।

केजरीवाल ने कहा कि सम-विषम नंबर के वाहनों के डे वाइज चलाने के लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। इसे नए साल पर प्रयोग के तौर पर 10 से 15 दिनों तक के लिए लागू किया जएगा। उसके क्या परिणाम आते हैं, उस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। अगर जनता को इससे ज्यादा परेशानी हुई तो हम इसे रोक भी सकते हैं।
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सुविधाएं उपलब्ध कराना उनके सरकार की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि आम लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराना उनके सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि प्रदूषण से निपटने के लिए पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर  कंट्रोल) केंद्रों को भी आधुनिक किया जा रहा है।

ट्रकों की एंट्री भी रात 11 बजे कर दी गई है। बदरपुर और राजघाट थर्मल पावर प्लांट बंद किए जाएंगे। यही नहीं एक जनवरी 2017 से हम दिल्ली में यूरो छह मानक के वाहनों को अनिवार्य कर देंगे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को  बेहतर बनाया जा सके इसके लिए दस हजार नई बसें सड़कों पर ला रहे हैं।

आप नेता संजय सिंह ने कहा कि सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी, जिससे जनता को दिक्कत हो। उन्होंने कहा कि इसे फिलहाल प्रायोगिक तौर पर 15 दिन के लिए लागू किया जाएगा। इसके बाद यह सफल रहा तो इसे आगे जारी रखा जाएगा। दिल्ली सरकार की कोशिश है इस योजना में जनता, केंद्र सरकार दोनों का साथ मिले।

अधिकारियों पर कसेगा शिकंजा

नियम 280 के तहत पूछे गए सवाल का जवाब 30 दिनों में अगर नहीं मिला तो दिल्ली सरकार के अधिकारियों पर शिकंजा कसेगा। उनसे पूछा जाएगा कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए।

विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि नियम 280 के तहत पूछे गए सवाल के महज 20 प्रतिशत ही जवाब सदन को मिला। 80 प्रतिशत जवाब नहीं आया। इस तरह से सदन की अवमानना भी हुई। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 30 दिनों के भीतर अगर संबंधित अधिकारी जवाब नहीं भेजते है तो उनसे पूछा जाएगा कि क्यों न उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए। अगले सत्र में जवाब नहीं देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा विधायक ओपी शर्मा का मामला आचरण समिति को सौंप दिया गया है। रामनिवास गोयल ने बताया कि समिति की जांच रिपोर्ट पर तय किया जाएगा कि शर्मा के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए।

गोयल ने बताया कि आचरण समिति के पास अधिकार होता है कि वह विधानसभा सदस्य की सदस्यता निरस्त कर दे या उसे जेल भेज दे। समिति की तीन बैठक अभी तक हुई है। बजट सत्र तक रिपोर्ट आ जाएगी। उनसे जब यह पूछा गया कि आचरण समिति में सिर्फ सत्ता पक्ष के ही सदस्य हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि आचरण समिति निष्पक्ष है या नहीं अगर कोई लिखित रूप में देता है और मिलता है तो इसपर विचार किया जाएगा।
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दिल पर पत्थर रखकर उठाया कदम

ओपी शर्मा पर लगाए गए जुर्माने के मुद्दे पर गोयल का कहना था कि सदन को शांतिपूर्वक चलाने केलिए कठोर कदम उठाना पड़ता है। दिल पर पत्थर रखकर यह कदम उठाया गया।

विधानसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता के सवाल पर गोयल ने कहा कि अध्यक्ष जितना भी निष्पक्षता के साथ काम करे विपक्ष जरूर कहता है कि सदन में उनकी आवाज दबाई जाती है। सदन में मैने सत्ता पक्ष के खिलाफ भी सख्ती बरती।

आप विधायक पंकज पुष्कर, नितिन त्यागी व अमानुतुल्ला के बीच विवाद के निपटारे के लिए विधानसभा अध्यक्ष तीनों विधायकों के साथ बैठक करेंगे। गोयल ने बताया कि पुष्कर बार-बार कह रहे थे कि उनका कत्ल हो जाएगा।

तीनों विधायकों की गतिविधियों से लग रहा था कि मारपीट हो जाएगी। इस तरह का माहौल सदन में नहीं होना चाहिए। इस विषय पर अलग से बैठक होगी ।
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