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होली पर करें गोवर्धन यात्रा

Wed, 12 Mar 2014 03:59 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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इस वीकेंड आप धार्मिक स्थल भ्रमण का मन बना रहे हैं, तो गोवर्धन जाने की तैयारी कर लीजिए। क्योंकि यहां तीर्थ के साथ सैर और पिकनिक का भी पूरा इंतजाम है।
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यहां एक ओर कई धार्मिक महत्व वाले मंदिर, कुंड, सरोवर हैं, तो दूसरी ओर सुंदर गोवर्धन पर्वत अपनी ओर खींचता है। यहां की यात्रा पुण्य लाभ के साथ मन को शांति भी देती है।

गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के अंतर्गत आता है। इसे गिरिराज के नाम से भी जानते हैं। गोवर्धन और इसके आस पास के क्षेत्र को ब्रज भूमि कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण बाल्यावस्था में यहीं खेला करते थे।
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भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली भी यही है। द्वापर युग में ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी अंगुली पर उठा लिया था।

यहां दूर-दूर से लोग गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने आते हैं। इसके अन्तर्गत सात कोस यानी करीब 21 किलोमीटर की परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा मार्ग में ही आन्यौर, राधाकुंड, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, गोविंद कुंड, पूंछरी का लोटा, दानघाटी जैसे प्रसिद्ध स्थल पड़ते हैं।

इसके अलावा यहां गोरोचन, धर्मरोचन, पापमोचन और ऋणमोचन नाम के चार कुंड हैं तथा भरतपुर नरेश की बनवाई हुई छतिरयां तथा सुंदर इमारतें हैं।

मंत्र मुग्ध कर देता है भव्य कुसम सरोवर
राधाकुंड से तीन मील की दूरी पर गोवर्द्धन पर्वत है। यहीं कुसुम सरोवर है, जो बहुत सुंदर बना हुआ है। यहां पहले वज्रनाभ के हरिदेवजी जी स्थापित थे। लोग बताते हैं कि औरंगजेब काल में वह यहां से चले गए। उसके बाद उसी स्थान पर दूसरी मूर्ति प्रतिष्ठित की गई।

यहीं है वृंदावन
मथुरा से दीघ को जाने वाली सड़क गोवर्धन पार करके जहां पर निकलती है, वह स्थान दानघाटी कहलाता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण दान लिया करते थे। इसी के पास 20 कोस के अंतर्गत वृंदावन था और आसपास यमुना बहती थीं।

ऐसे पहुंचें गोवर्धन
दिल्ली से मथुरा की दूरी की करीब डेढ़ सौ किलोमीटर है। वहां करीब चार सौ रुपये खर्च करके पहुंचा जा सकता है। अगर बुकिंग की कार से यात्रा करना चाहते हैं तो करीब 14 सौ रुपये खर्च करने होंगे।

उसके बाद की गोवर्धन की मथुरा से दूरी केवल 20 किलोमीटर है। जिसके लिए मथुरा जंक्शन या बस स्टेशन से हर समय जीप/बस/टेक्सी आदि साधन उपलब्ध रहते हैं। इसके लिए बस 20-30 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

ये हैं ठहरने के स्थान
गोवर्धन एवं जतीपुरा में कई धर्मशालाएं एवं होटल हैं जहां रुकने एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था हो जाती है। आमतौर पर यहां हमेशा श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। इसलिए नये होटल भी बनाए जा रहे हैं।

ये हैं धार्मिक मान्यताएं-

मानसी गंगा पर होती है पूजा
मानसी गंगा पर गिरिराज का मुखारविंद है, जहां उनका पूजन होता है। इसी के आसपास गोवर्धनग्राम बसा है। यह लोगों के खास आकर्षण का कारण है। यहीं वज्रनाभ के ही एकचक्रेश्वर महादेव का मंदिर है।

छोटी दिवाली पर दीया जलाने से होता है रोगों का नाश
दीपावली के दिन गोवर्धन पर्वत पर दीपमाला सजाई जाती है। खासतौर पर छोटी दीवाली के दिन देश भर के लोग यहां दीप जलाने पहुंचतें हैं। ऐसी मान्यता है कि छोटी दिवाली पर यहां दीप जलाने से रोग-दोष का नाश हो जाता है।
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दंडौती परिक्रमा से होता है पुण्य लाभ
यहां लोग दंडौती परिक्रमा करते हैं। दण्डौती परिक्रमा इस प्रकार की जाती है कि आगे हाथ फैलाकर जमीन पर लेट जाते हैं और जहां तक हाथ फैलते हैं, वहां तक लकीर खींचकर फिर उसके आगे लेटते हैं।

इसी तरह लेटते-लेटते परिक्रमा करते हैं। यह एक से दो सप्ताह में पूरी हो पाती है। ऐसा करने से पीढ़ियों के पाप धुल जाने की मान्यता है।

मेले में आते हैं लाखों श्रद्धालु
गिरिराज के मुखारविंद मानसी गंगा पर हर साल आषाढ़ी पूर्णिमा तथा कार्तिक अमावस्या को मेला लगता है। इसमें देश भर के लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।
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