पुलिस ने छानबीन के बाद एक नाबालिग लड़की के गायब होने पर अपहरण और आठ बालिग के गायब होने पर उनकी गुमशुदगी दर्ज कर छानबीन शुरू की। पता चला कि गायब सभी लड़कियां मानव तस्करी और देह व्यापार पीड़िताएं थीं। सभी लड़कियों को महिला आयोग ने मुक्त कराया था। बाल कल्याण समिति के आदेश पर यह लड़कियां यहां रह रही थीं।
इस बात पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि आखिर यह ही लड़कियां क्यों गायब हुईं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई बाहरी शख्स के इशारे पर इन लड़कियों को आश्रम से निकालकर दोबारा देह व्यापार में धकेला गया हो। लड़कियों के परिवारों से भी संपर्क कर पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह लड़कियां उनके संपर्क में हैं या नहीं। इसके लिए पुलिस ने नेपाल दूतावास से संपर्क किया है।
मई 2018 में लड़कियों को मुक्त कराकर दिलशाद गार्डन स्थित दिल्ली सरकार के संस्कार आश्रम में आश्रय दिया गया था। लड़कियों की बाकायदा ट्रेनिंग कराकर बाल कल्याण समिति ने जीटीबी अस्पताल में गार्ड के रूप में नौकरी लगवाई थी। तीन महीने अनुबंध पर नौकरी करने के बाद लड़कियों का कांट्रेक्ट समाप्त हो गया था। चूंकि सभी लड़कियों को मानव तस्करों व देह व्यापारियों से मुक्त कराया गया था, इसलिए कड़ी निगरानी में लड़कियों को संस्कार आश्रम वालों के साथ ड्यूटी पर भेजा जाता था।
ह्मूमन इंटेलिजेंस व कैमरों की मदद ली जा रही
गायब हुईं लड़कियों का पता लगाने के लिए पुलिस ह्मूमन इंटेलिजेंस व सीसीटीवी कैमरों की मदद ले रही है। पुलिस आश्रम के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है। अपने मुखबिरों की भी मदद ली जा रही है। वहीं रेड लाइट एरिया में भी इंटेलिजेंस के जरिये अपने सोर्स को पुलिस खंगाल रही है।