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रक्षा बंधन पर चाइनीज राखियों से छात्राएं कर रही तौबा

Tue, 18 Aug 2015 08:19 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
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साइबर सिटी में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को प्रकट करने वाले त्योहार रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। सदर बाजार से लेकर हर छोटे-बड़े बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं।
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लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर बाजार में एक विशेष चीज देखने को मिल रही है। वह है चाइनीज राखियों से लोगों का घटता प्रेम। लोग चाइनीज राखियों की जगह स्वदेशी राखियां खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

हर साल चाइनीज राखियों से पटे रहने वाले बाजारों में इस बार चाइनीज राखियां जरा कम ही दिख रही हैं। कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से चाइनीज उत्पादों के खिलाफ लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है।
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जागरूक हो रही छात्राएं

इसका असर भी लोगों को पड़ना शुरू हो गया है। स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं भी अब चाइनीज राखियों से तौबा कर रही हैं।

संस्कार भारती के जिला मीडिया प्रभारी राजीव मित्तल ने कहा कि शुरू से ही उनकी संस्था भारतीय उत्पादों को अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित कर रही है।

इस बार चाइनीज राखियों के प्रति लोगों की घटती दिलचस्पी इसका प्रमाण है कि लोग जागरूक हो रहे हैं। बाजार में इस बार दो से लेकर 350 रुपये तक की राखियों की बिक्री हो रही है।
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छोटा भीम और डोरेमॉन का क्रेज

फिलहाल अभी राखियों की खरीदारी उन बहनों की ओर से की जा रही है कि जिनके भाई दूसरे शहरों या देश में हैं। वह उन्हें डाक के माध्यम से राखियां भेज रही हैं।

सदर बाजार में राखी विक्रेता संजय कुमार का कहना है कि चाइनीज राखियां काफी कम बिक रही हैं। वह सिर्फ बच्चे ही खरीद रहे हैं।

क्योंकि उसपर उनके पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर (छोटा भीम, डोरेमॉन, मिक्की-माउस, टॉम एंड जेरी) की आकृति है। बड़े तो स्वदेशी राखियों को ही पसंद कर रहे हैं।

सोशल साइट्स (फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप) पर चाइनीज राखियों के खिलाफ अभियान शुरू हो गया है। लोगाें से अपील की जा रही है कि वह इन स्वदेशी राखियों को खरीदे।
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