साहिबाबाद और इंदिरापुरम के स्टॉर्म रेन वॉटर ड्रेन (बरसाती नाला) और बांथला नहर के जरिए औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट की निकासी यमुना में की जा रही है। इसे रोकने के लिए संबंधित प्राधिकरणों, मंत्रालयों और सरकारोें की ओर कोई कदम नहीं उठाए जाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने इन्हें नोटिस जारी किया है।
मामले में अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।एनजीटी ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली सरकार के संबंधित प्राधिकरणों के साथ ही केंद्र एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेज कर मामले में जवाब मांगा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने गाजियाबाद निवासी याचिकाकर्ता सुशील राघव और आकाश वशिष्ठ की ओर से आदेश का उल्लंघन किए जाने की शिकायत पर नोटिस दिया गया है। दो हफ्ते में सभी को नोटिस का जवाब देना है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2008 के मौजूद आंकड़ों के मुताबिक साहिबाबाद स्ट्रॉर्म वाटर ड्रेन से प्रतिदिन 20 करोड़ लीटर (एमएलडी) से ज्यादा घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट की बिना शोधन निकासी की जाती है। इसके गाजियाबाद की विभिन्न कालोनियों से बरसाती नाले में गिराया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों में शोधन संयंत्र (सीईटीपी) नहीं है और न ही उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संबंध में कुछ किया है। इंदिरापुरम में मौजूद शोधन संयंत्र के जरिए सिर्फ 56 एमएलडी घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट (मिक्स) की निकासी की जाती है जबकि प्लांट की क्षमता 74 एमएलडी है।
उनका कहना है कि बरसाती नाले में अपशिष्ट और ठोस कचरे की निकासी, ठोस कचरा अधिनियम-2016 का उल्लंघन है।