सामाजिक वानिकी विभाग ने कछुओं और मगरमच्छों के संरक्षण के लिए दूसरा शोध केंद्र खोलने की तैयारी कर ली है। एक शोध केंद्र पहले ही कानपुर में स्वीकृत हो चुका है। इस शोध केंद्र में विशेषज्ञ दुर्लभ जाति के कछुओं और मगरमच्छों के संरक्षण के लिए अध्ययन करेंगे और इनके अंडों का निषेचन कराया जाएगा।
यहां पर इनके बच्चों को नर्सरी में पालकर बड़ा भी किया जाएगा। इसके बाद ही इनको नदियों में छोड़ा जाएगा। कछुआ और मगरमच्छ अपने अंडे नदियों के किनारे के रेत में देते हैं। यहीं पर इनका निषेचन होता है लेकिन नदियों के किनारों तक लोगों का हस्तक्षेप होने से इनके अंडों को निषेचन के लिए उचित माहौल नहीं मिल पाता है।
वन क्षेत्राधिकारी अब्दुल साजिद ने बताया कि गाजियाबाद में एक शोध संस्थान बनाने का प्रस्ताव शासन ने स्वीकार कर लिया है। इसमें विशेषज्ञ मगरमच्छों और कछुओं के अंडों को संरक्षित करेंगे और उनका निषेचन अनुकूल माहौल में कराया जाएगा।
इसमें छोटे बच्चों को पालने के लिए नर्सरी भी होगी। बच्चों के बड़ा होने पर उनको नदियों में छोड़ दिया जाएगा। कुछ दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को यहां पर रखकर इनकी संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया कराई जाएगी।