भूकंप के झटकों से एनसीआर की धरती बुधवार को सप्ताह में दूसरी बार हिली। रविवार को भूकंप के बाद बुधवार शाम फिर से धरती हिली। भूकंप के झटकों ने एक बार फिर टीएचए की हाईराइज बिल्डिंग में रहने वाले लोगों में दहशत भर दी।
पिछले 4 दिन में लगातार दूसरी बार आए भूकंप से लोग डरे-सहमे दिखाई दिए। झटके महसूस होते ही लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए। उत्तराखंड में रिएक्टर स्केल पर सात तीव्रता वाले भूकंप से देश के कई राज्यों की धरती हिली।
एनसीआर मे इसकी तीव्रता काफी हल्की रही। रात 7.35 पर आए भूकंप का पता कुछ ही लोगों को लग पाया। ज्यादातर लोगों को भूकंप आने की जानकारी समाचारों से मिली। इसके बाद दोबारा से भूकंप आने के डर से लोग घरों से बाहर निकल आए।
शहर में मालीवाड़ा, राजनगर, शास्त्रीनगर, संजयनगर, कविनगर, नेहरूनगर और गांधीनगर क्षेत्रों में लोगों में काफी देर तक हड़कंप मचा रहा। लोगों को डर था कि भूकंप दोबारा आ सकता है। करीब एक घंटा बाहर खुली सड़कों और पार्कों में इंतजार करने के बाद ही लोग घरों में लौटे।
वैशाली सेक्टर-2 के मनोज गोयल ने बताया कि दुकान में बैठे थे कि अचानक कुर्सी मेज हिलने लगे। ऐसे में तुरंत वे दुकान से बाहर भागे। बाहर आए तो देखा सभी लोग अपने घरों से निकलकर बाहर आ गए थे। बाद में लोग दुकान में बैठने से भी डरते रहे।
वैशाली सेक्टर सेक्टर-1 के नरेंद्र रावत ने बताया कि घर बैठकर टीवी देख रहे थे। भूकंप आने का एहसास होते ही घबराहट में परिवार के सदस्यों के साथ बाहर भागे। कुछ देर बाद न्यूज देखा तो पता चला कि इसका केंद्र म्यांमार था।
मगर झटके काफी तेज थे। इंदिरापुरम, शिप्रा सनसिटी, डेल्टा कालोनी, कौशांबी, शालीमार गार्डन, लाजपत नगर, राजेंद्र नगर में रहने वाले लोग भी भूकंप के झटकों के बाद दहशत में रहे।
समय बढ़ता तो हो सकती थी हानि
भूगर्भ वैज्ञानिक डा. नवीन कुमार दास ने बताया कि लगातार आ रहे भूकंप से खतरा बढ़ गया है। दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह की बहुमंजिला इमारतें हैं उसे देखते हुए यह काफी अच्छा रहा कि झटके बहुत ही कम समय के लिए थे। इतना ही नहीं दिल्ली एनसीआर सुप्त ज्वालामुखी जोन में आता है। ऐसे में एक साथ कई बार झटके आने की संभावना बनी रहती है।