सराफा कारोबारियों की 43 दिन पुरानी हड़ताल खुलते ही बाजार में रौनक छा गई। सोने के दाम में बढ़ोतरी के बावजूद लोगों ने बुधवार को आभूषणों की ठीकठाक खरीदारी की। सराफा कारोबारियों का मानना है कि एक-दो दिन में ग्राहकों की संख्या में और बढ़ोतरी होगी।
दुकानों पर भीड़ देखकर दुकानदारों के चेहरे खिल उठे। ब्रांडेड शोरूम से लेकर छोटी-बड़ी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। दोपहर तक ज्यादा ग्राहक बाजार में नहीं थे। हड़ताल खुलने के बाद पहला दिन होने के चलते ज्यादातर लोगों को इनकी जानकारी भी नहीं थी। तेज धूप ने भी लोगों को रोके रखा।
शाम को एकाएक बाजार में भीड़ बढ़ गई। सराफा की दुकानों पर ग्राहक पहुंचने लगे। सोने के दाम करीब एक हजार रुपये ज्यादा पर खुले। बाजार में सुबह का भाव 29 हजार से ज्यादा था। मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष अजय वर्मा ने बताया कि सराफा बाजार में करीब 14 करोड़ की बिक्री हुई।
सहालग शुरू होने पहले सराफा बाजार खुलने से कारोबारियों में खुशी का माहौल है। पिछले दिनों सहालग के बीच में हड़ताल आ गई थी। इससे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। अबकी बार सहालग में अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
सीन एक - आरडीसी - रवि ज्वैलर्स
रवि ज्वैलर्स पर सुबह को आठ-दस ग्राहक ही पहुंचे थे। दोपहर बाद से ग्राहकों की भीड़ लगी रही। इससे जमकर खरीदारी हुई। शोरूम के मालिक रवि वर्मा ने बताया कि हड़ताल के बाद बाजार खुलने से एक सप्ताह तक ग्राहकों की ज्यादा भीड़ रहेगी।
सीन दो - अंबेडकर रोड- दीपाली ज्वैलर्स
दीपाली ज्वैलर्स पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। लोगों ने अपनी जरूरत के हिसाब से जेवरात खरीदे। शोरूम के मालिक गौरव गर्ग ने बताया कि कारीगरों को थोक में जेवरात बनाने के आदेश दिए गए हैं। एक सप्ताह तक कारीगर दिनरात मेहनत करके जेवरात बनाएंगे।
हड़ताल में करोड़ों का कारोबार बिक्री, आईटी जांच शुरू
गाजियाबाद। सराफा कारोबारियों की हड़ताल पर अब आयकर विभाग की नजर है। अफसरों को जानकारी मिली है कि हड़ताल के दौरान करोड़ों के जेवरात की सेल की गई, वह भी नगद। ऐसे में ब्लैकमनी के सोना-चांदी खरीद में खपने की आशंका है। इस मामले की विभाग ने जांच शुरू करा दी है।
सराफा कारोबार 43 दिन तक बंद रहा। इस दौरान कारोबारियों ने अपनी दुकानों पर ताले डालकर रोजाना प्रदर्शन किया। भूख हड़ताल भी की गई। बाजारों में सराफा कारोबारियों की सभी दुकानें बंद थीं। इसके बावजूद शादी विवाह के सीजन में भी लोगों ने जपनी जरूरत के अनुसार जेवरात खरीदे।
अफसरों का मानना है कि केवल दिखावे के लिए दुकानें बंद रखी गईं। जेवरात की बिक्री की गई। संगठन की पकड़ में आने से बचने के चलते इस दौरान दुकानदारों ने चोरी-छिपे बिक्री की, वह भी बिल्कुल नगद। इस दौरान करोड़ों की बिक्री का कोई हिसाब नहीं रखा गया है।
इसमें काला धन खपने की आशंका है। आयकर अधिकारियों ने सराफा कारोबारियों के बैंक खातों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। हड़ताल केदिनों का सराफा कारोबारियों का बैंक ट्रांजक्शन मांगा जा रहा है।
इसके आधार पर सराफा कारोबारियों की कमाई को सर्च करके उनसे इनकम टैक्स वसूला जा सकता है। इस दौरान बड़ी खरीद करने वालों की भी पहचान की जा रही है। ज्वाइंट कमिश्नर इनकम टैक्स एस लाल ने बताया कि इस संबंध में बैकों से जानकारी मांगी गई है। इसके आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।