गाजियाबाद। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत अब सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर होने वाले अल्ट्रासाउंड की ट्रैकिंग की जाएगी।
फार्म-एफ के माध्यम से मिले डाटा से इसकी जांच कराई जाएगी कि जिस गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कराया गया था, उसके यहां बच्चे का जन्म हुआ है या नहीं। इसके लिए संयुक्त टीम ने सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से डाटा एकत्र करना शुरू कर दिया है।
तमाम उपायों के बावजूद पश्चिमी यूपी में बेटियों की संख्या घटती जा रही है। इसे रोकने के लिए शासन द्वारा पीएनडीटी एक्ट के तहत सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण और छापेमारी भी की जाती है लेकिन नतीजा फिर भी सिफर ही रहता है।
गाजियाबाद में फिलहाल एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या मात्र 895 है। इसलिए कन्या भ्रूण हत्या को रोकने लिए इस बार नई योजना बनाई गई है। योजना के तहत सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर्स के ‘फार्म एफ ’ का डाटा खंगाला जाएगा।
फार्म एफ में भरे गए डिटेल के आधार पर 16 सप्ताह से कम के गर्भ का अल्ट्रासाउंड हुए परिवार के घर पर यह पता किया जाएगा कि बच्चे की डिलीवरी हुई है या नहीं। अगर उस अल्ट्रासाउंड कराए गए दंपति के यहां डिलीवरी नहीं हुई तो इसका मतलब यह समझा जाएगा कि एबॉर्शन कराया गया है।
‘फार्म एफ’ में अल्ट्रासाउंड केंद्र पर होने वाले अल्ट्रासाउंड की पुरी डिटेल जैसे कितने माह का गर्भ, गर्भवती महिला का नाम, पता फोन नंबर सब भरा जाता है। इसी नंबरों और डिटेल के आधार पर जांच की जाएगी।