जिला महिला अस्पताल की नर्सरी में एक बार फिर से नवजात शिशुओं का उपचार शुरू हुआ है। अब महिला अस्पताल में पैदा होने वाले बीमार बच्चों को बाहर रेफर नहीं किया जाएगा। बाल रोग विशेषज्ञ के रिटायर होने के बाद पिछले दो महीने से एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) बंद पड़ा था।
अब फिर से बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद बुधवार को तीन नवजात शिशुओं को नर्सरी में भर्ती किया गया है।महिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ से दस प्रसव होते हैं। गर्भावस्था के दौरान अधिकतर शिशुओँ को पीलिया या निमोनिया हो जाता है। कुछ की हालत गंभीर होती है, जिसके लिए उन्हें एसएनसीयू में रखने की जरूरत पड़ती है।
महिला अस्पताल में एसएनसीयू बनने के पांच वर्ष बाद भी स्टाफ के अभाव में शिशुओं का ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा है। इस साल दो तीन महीने एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनाती के बाद शिशुओं का इलाज हुआ था लेकिन वह रिटायर हो गए।
अब जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. विकासेंदू अग्रवाल को तैनात किया गया है। सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि जल्द ही अन्य स्टाफ की भी भर्ती की जाएगी जिससे एसएनसीयू सुचारु रूप से चलने लगे।