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किसान आंदोलन: आज पूरे हुए छह माह, आगे भी जारी रहने की उम्मीद, पढ़ें- 6 महीने की 6 बड़ी बातें

Wed, 26 May 2021 01:31 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिबाबाद

सार

26 नवंबर से किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। इस छह माह में आंदोलन के कई रंग देखने को मिले। 26 जनवरी का दिन कभी नहीं भूला जा सकता। जब पूरी दिल्ली में किसानों के हजारों ट्रैक्टर दौड़े थे।
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किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को आज छह माह पूरे हो गए। यह आगे कब तक चलेगा, इसका पता नहीं है। किसानों का कहना है कि आंदोलन का अंजाम भविष्य के गर्भ में है। हालांकि उन्हें यह आशंका है कि सरकार कोरोना या किसी बहाने यूपी बॉर्डर से हटा सकती है। भाकियू ने वेस्ट यूपी के कई जिलों के पांच हजार किसानों की सूची तैयार की है। जिन्हें एक कॉल पर दो से ढाई घंटे के अंदर बॉर्डर पहुंचने के लिए तैयार रखा गया है। फिलहाल छह माह पूरे होने पर 26 मई को किसानों ने काला दिवस मनाने का एलान किया है।

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26 नवंबर से किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। इस छह माह में आंदोलन के कई रंग देखने को मिले। 26 जनवरी का दिन कभी नहीं भूला जा सकता। जब पूरी दिल्ली में किसानों के हजारों ट्रैक्टर दौड़े थे। इससे पहले भी दिसंबर और जनवरी में किसानों की भीड़ हजारों की संख्या में यूपी गेट पर जमी रही। इस बीच सरकार से आठ दौर की वार्ता हुई जो सारी विफल रहीं। 29 जनवरी को जब राकेश टिकैत के आंसू टपकने पर हजारों किसान फिर से यूपी गेट पर जुट गए थे तो वार्ता की उम्मीद जगी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री ने आंदोलनस्थल को एक कॉल की दूरी बताया था। गन्ना व गेहूं कटाई के चलते भीड़ घटती चली गई। फिर कोरोना के चलते तो संख्या हजार से भी नीचे चली गई। अब पांच किलोमीटर में फैले तंबुओं का दायरा काफी सिमट गया है। कोरोना के कारण आंदोलनस्थल के प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया है।

सरकार से अब भी वार्ता की उम्मीद : राकेश टिकैत
इस सिमटे हुए आंदोलन पर राकेश टिकैत का कहना है कि हमें कम न समझें। जिन पांच हजार किसानों को सूचीबद्ध किया गया है, वे हमारे कैडर हैं। उनके पीछे लाखों किसान हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल सरकार ने यह सोच लिया कि एक दिन हम थककर अपने गांव लौट जाएंगे इसलिए हमने लंबी लड़ाई की रणनीति बनाई। एक कॉल पर यहां पांच हजार किसान दो ढाई घंटे में जुट जाएंगे, जबकि इनके पीछे भी हजारों किसान आएंगे। उन्होंने कहा कि कब तक आंदोलन चलेगा, यह तो नहीं कह सकते लेकिन हमें आज भी सरकार से वार्ता की उम्मीद है। 26 मई को किसान खेतों, गांव के चौराहों, वाहनों और आंदोलनस्थल पर काला झंडा लगाकर काला दिवस मनाएंगे।

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आंदोलन के शुरू से अब तक घर नहीं लौटने वाले बुजुर्ग किसानों से बातचीत

कैसे लौट जाएं घर, क्या यह सोचकर घर लौट जाएं कि हमें सदा घाटे की किसानी ही करनी है। इस साल गेहूं पर एमएसपी 1975 रुपये क्विंटल है। व्यापारियों के हाथ 1720 रुपये क्विंटल बेचना पड़ा। ढाई सौ क्विंटल गेहूं बेचा तो साढ़े 62 हजार रुपये का नुकसान हुआ। - राजबीर सिंह

आंदोलन के पहले दिन से लेकर आज तक घर लौटने का मन नहीं किया। बाबा टिकैत अंतिम दम तक संघर्ष का संकल्प दिलाकर वह हमसे विदा हुए थे। हम यहीं दफन हो जाएंगे लेकिन मांगें न माने जाने तक घर नहीं लौटेंगे। - धरमवीर बालियान

हम कौन सा जिंदा हैं जो कोरोना से मौत का डर लगेगा। सरकार ने तो जिंदा मार रखा है। खाली हाथ घर लौटेंगे तो बच्चों का भविष्य देखकर मर जाएंगे। - रघुनाथ वैद

लगातार सरकार का पतन देख रहे हैं। इस बीच पंचायत चुनाव से लेकर पश्चिम बंगाल तक में भाजपा का नुकसान देखा। एक दिन सरकार को हमारी मांग माननी पडे़गी। इसी इंतजार में बैठे हैं। - यतेंद्र ठाकरान

 
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छह महीने के आंदोलन में छह बड़ी बातें

- 10 दिसंबर को एक्सप्रेसवे के 14 लेन को किसानों ने किया बंद
- 15 दिसंबर को नरेश टिकैत की महापंचायत में उमड़े किसान
- 22 जनवरी को सरकार से आठवीं दौर की वार्ता के बाद फिर बात नहीं हुई
- 26 जनवरी को पूरे दिल्ली में दौड़ा किसानों का हजारों ट्रैक्टर
- 28 जनवरी को राकेश टिकैत के आंसू टपके तो उमड़ पड़े किसान
- 18 अप्रैल को दिल्ली से गाजियाबाद जाने वाली लेन को पुलिस ने खोला
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