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स्कूल बढ़ा रहे फीस, पैरेंट्स में सुलग रही चिंगारी

Sat, 23 Apr 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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फीस वृद्धि पर भड़के अभिभावक - फोटो : amar ujala
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महानगर के प्राइवेट स्कूलों में एक बार फिर फीस वृद्धि का मामला तूल पकड़ने लगा है। लगातार बढ़ती फीस और स्कूल संचालकों की मनमानी के खिलाफ पैरेंट्स लामबंद होने लगे हैं। यही कारण है कि पिछले दिनों कुछ स्कूलों में संचालकों और पैरेंट्स के बीच टकराव तक की नौबत आ गई। इसे देखते हुए प्रशासन पहले से ही अलर्ट हो गए है।  
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शहर के नामी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना अब मुश्किल होता जा रहा है। कई पब्लिक स्कूल ऐसे भी हैं, जहां नर्सरी की फीस बीटेक कोर्स से भी ज्यादा है। इस बार भी स्कूलों ने फीस में 10 से 12 प्रतिशत फीस की बढ़ोतरी की है। तो कुछ ने 20 से 25 फीसदी फीस बढ़ाई है। वहीं, स्कूलों में खुली दुकानों में प्रिंट रेट पर कॉपी-किताबें बेची जा रही हैं। जबकि सीबीएसई के नियमानुसार स्कूल परिसर में कॉपी-किताबें नहीं बेची जा सकती।  

गरीब बच्चों को दाखिला न देने पर सात स्कूलों को नोटिस
आरटीई सहित अन्य कोटे के तहत प्राइवेट स्कूलों 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए निर्धारित हैं। लेकिन एनओसी की शर्तों का उल्लंघन कर कई स्कूलों ने एक भी गरीब बच्चे को प्रवेश नहीं दिया। इसी बाबत जिला प्रशासन ने वनस्थली, कैम्ब्रिज, सेंट फ्रांसिस, छाया पब्लिक स्कूल, केआर मंगलम स्कूल, इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, मॉडर्न एकेडमी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।   
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डेवलपमेंट फीस जमा न करने पर रोका था रिजल्ट
कुछ दिन पहले प्रीजिडियम स्कूल ने करीब 50 बच्चाें का परीक्षा परिणाम रोक दिया था। इसके बाद अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। अभिभावकों का आरोप था कि पिछले वर्ष स्कूल प्रबंधन ने लिखकर दिया था कि जब तक फीस वृद्धि के मुद्दे पर निर्णय नहीं होता, तब तक वे वार्षिक शुल्क और डेवलपमेंट चार्ज नहीं लेंगे। फिर भी स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों पर दबाव बनाने के लिए परीक्षा परिणाम रोक लिया।

क्या कहती है पैरेंट्स एसोसिएशन
डीपीएसजी स्कूल अभिभावक एसोसिएशन के सदस्य राजीव कुमार का कहना है कि फीस मामले में हाईकोर्ट में केस चल रहा है। स्कूल प्रबंधन ने इस वर्ष भी 11 प्रतिशत फीस बढ़ाई है। एसोसिएशन ने इस संबंध में प्रशासन से शिकायत की है।

स्कूलों की मनमानी काफी बढ़ गई है। कोर्ट के आदेश हैं कि स्कूल प्रति माह फीस ले सकता है। जबकि अभिभावकों से एडवांस के रूप में तिमाही फीस ली जा रही है। खुलेआम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है। - नीरज भटनागर

स्कूलों को अपनी बैलेंस शीट और एनओसी का ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए, लेकिन स्कूल ऐसा नहीं कर रहे हैं। अभिभावकों की मांग है कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की टीम बनाकर स्कूल के एनओसी और दस वर्ष की बैलेंस शीट की जांच की जाए।     -शिवानी जैन, ऑल स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन

क्या कहते हैं अभिभावक
फीस कई गुना बढ़ गई है। कई स्कूल एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, बिल्डिंग चार्ज तक लेते हैं, जिसका अभिभावकों से कोई संबंध नहीं होता। ये फीस हटाई जानी चाहिए। - दीपक गर्ग

बीते तीन साल में फीस 50 प्रतिशत बढ़ी है। बेटा डीपीएसजी में बेटा कक्षा दो पढ़ता है। इस साल एडमिशन के वक्त करीब 38 हजार रुपये लिए गए हैं। इसमें 8 हजार रुपये मंथली फीस, 1100 रुपये ट्रांसपोर्ट फीस है। जबकि 2011 में बच्चे के प्री नर्सरी में एडमिशन में ही करीब 50 हजार रुपये जमा कराए थे। वहीं इस वर्ष करीब 90 हजार लिए जा रहे हैं। - अमित गुप्ता

क्या कहते हैं स्कूल प्रिंसिपल
इस वर्ष नेहरू वर्ल्ड स्कूल में 10 प्रतिशत फीस बढ़ी है। स्कूल के डायरेक्टर अरुणाभ सिंह ने बताया कि नियमों के हिसाब से फीस बढ़ाई है। इसमें टीचरों की सैलरी से लेकर खर्चे शामिल हैं।

डीडीपीएस की सभी ब्रांच में कक्षा के मुताबिक पांच प्रतिशत फीस बढ़ी है। डीडीपीएस संजय नगर ब्रांच की प्रिंसिपल प्रिया ढल का कहना है कि नर्सरी से कक्षा 12 वीं तक की फीस में 200 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नर्सरी से कक्षा पांच की फीस 1600 से बढ़कर 1800 रुपये, कक्षा 6 से 10 की फीस 2000 से बढ़कर 2200 रुपये और कक्षा 11 व 12 की फीस 2200 से बढ़कर 2400 रुपये हुई है।

ब्राइटलैंड स्कूल की प्रबंधक बलविन खंडेलवाल का कहना है कि उनके यहां भी 10 प्रतिशत फीस बढ़ी है। इस सेशन बच्चों को नई टेक्नोलॉजी से पढ़ाया जाएगा, इसलिए फीस बढ़ाई गई है।

डीपीएस एचआरआईटी स्कूल की प्रिंसिपल मीनाक्षी चटर्जी का कहना है कि स्कूल में एक से डेढ़ प्रतिशत फीस बढ़ी है। ट्रांसपोर्ट और एनुअल चार्ज नहीं बढ़ाया है।

गुरुकुल स्कूल के डायरेक्टर सचिन वत्स का कहना है कि इस साल 15 प्रतिशत फीस बढ़ी है। यहां प्रति सेक्शन केवल 30 स्टूडेंट्स हैं। जबकि अन्य स्कूलों में 40 से 45 बच्चे होते हैं। रेशियो निकाला जाए तो इतनी फीस लेना वाजिब है। हालांकि अधिकांश पैरेंट्स ने फीस जमा करा दी है। बाकी पैरेंट्स से बातचीत की जा रही है।

क्या कहते हैं डीआईओएस
डीआईओएस राज सिंह यादव का कहना है कि फीस मामले में एडीएम सिटी की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जा चुकी है। छुट्टियों के कारण कमेटी की बैठक नहीं हो पाई। अगले हफ्ते बैठक बुलाकर पब्लिक स्कूल प्रबंधकों को फीस वृद्धि, ड्रेस, कापी, किताब मामले में दबाव डाला जाएगा कि वह अभिभावकों का शोषण न करें। रिपोर्ट बनाकर डीएम को दी जाएगी।
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