ब्लड कैंसर पीड़ित अपने दोनों मासूम बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए आसमां कुदरत के हर सितम को अपने आंचल में समेटे है। आंखों से निकलते आंसू उसके दर्द को बयां करते हैं। इलाज के लिए पिता का मकान तक पांच प्रतिशत ब्याज पर गिरवी रखा हुआ है।
हालांकि, अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद समाज सेवियों और एनजीओ के साथ-साथ शासन प्रशासन भी मासूमों की जिंदगी बचाने की मुहिम में लग गया है। शनिवार को एसडीएम अतुल कुमार ने पीड़ित परिवार से बातचीत कर फरीदनगर में डूडा का मकान पीड़ित परिवार को दिलाने और कैंसर विशेषज्ञ टीम को शीघ्र बुलाने की बात कहीं है।
मुरादनगर की नया नूरगंज कालोनी में रहने वाले यामीन (75) ने सपने में भी नहीं सोचा था कि बुढ़ापे में यह दिन देखने को मिलेंगे। रीढ़ की हड्डी में परेशानी के चलते यामीन कोई काम नहीं कर सकते हैं। बेटा मोमीन मजदूरी करता है। पत्नी शकीना के वॉल्व खराब हैं।
बड़ी बेटी आसमां का ललियाना बागपत में निकाह किया था। उसे भी पति ने तलाक दे दिया और वो भी तब जब आसमां के दोनों बच्चे ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं। पति ने जब तलाक दिया उस वक्त आसमां गर्भवती थी।
पिता के घर में उसने तीसरे बेटे जैद को जन्म दिया था, जिसकी एक साल बाद 22 अगस्त को कैंसर पीड़ित होने के चलते मौत हो गई। अब आसमां अपने दो मासूमों कैस (4), कैफ (ढाई साल) की जिंदगी बचाने के लिए जद्दोजहद में लगी है।
आसमां बताती है कि बच्चे ब्लड कैंसर से पीड़ित हैं, उसे डेढ़ साल पहले पता चला। दूसरे नंबर के बेटे कैफ को बुखार आया और उसने मोदीनगर स्थित बाल रोग विशेषज्ञ राजेश गुप्ता से इलाज कराया।
15 दिन बाद फिर कैफ की तबीयत बिगड़ गई और उसने उसे मेरठ एक प्राइवेट डाक्टर को दिखाया, जिसने कैफ को कैंसर बताते हुए खून चढ़ाया। इसी बीच कैस और जैद का टेस्ट कराया तो उन्हें भी ब्लड कैंसर निकला।
आसमां बताती है कि वह एक बेटा खो चुकी है, अब दोनों बेटों को बचाने की जद्दोजहद है। एक से डेढ़ माह में एक बार कैफ का खून बदला जाता है, जिसमें एक से डेढ़ लाख खर्चा आता है। रविवार को वह फिर खून चढ़वाने कैफ को लेकर दिल्ली के एम्स हास्पिटल में जाएगी।
शनिवार को एसडीएम अतुल कुमार ने पीड़िता से बातचीत की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। एसडीएम ने बताया कि फरीदनगर में डूडा के मकान हैं। पीड़ित परिवार को उसमें आवास दिलाया जाएगा।
इसके अलावा सदर तहसील अंतर्गत हाईवे 58 पर चैरिटेबल का कैंसर रोग का हास्पिटल है। डीएम से बातचीत कर हास्पिटल से कैंसर विशेषज्ञ की टीम जांच के लिए भेजी जाएगी। हालांकि बातचीत के दौरान बच्चों के चल रहे इलाज संबंधी पर्चे नहीं मिल सके । महिला ने बताया कि वह कागज रविवार को कैफ को खून चढ़ना है, इसके चलते उसका भाई दिल्ली लेकर गया है।
ब्लड कैंसर में चढ़ाया जाता खून
ब्लड कैंसर में खून चढ़ाया जाता है। खून से स्लाइड खत्म होने के कारण खून पानी हो जाता है। ऐसे हालात में खून चढ़ाया जाता है। इसकी कोई अवधि नहीं होती है। कैंसर किस स्तर पर पहुंच गया है उसके आधार पर ही खून चढ़ाया जाता है। -डा. पवन कुमार, जीवन हॉस्पिटल मोदीनगर
अमर उजाला का शुक्रिया
पीड़ित आसमां का कहना है कि अमर उजाला जिस प्रकार उसके परिवार का साथ दे रहा है, उसे उम्मीद हो गई कि वह अपने दोनों बच्चों की जिंदगी बचाने में कामयाब हो जाएगी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद भी शासन-प्रशासन ने ध्यान दिया है। मैं और मेरा परिवार अमर उजाला का ऋण रहेगा।