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Ghaziabad News: बार एसोसिएशन गाजियाबाद चुनाव विवाद पर याचिका खारिज

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गाजियाबाद। बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर हुए विवाद में डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स सोसायटी एवं चिट्स की कार्यवाही के बाद दाखिल याचिका को उपजिलाधिकारी की अदालत ने निरस्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी पक्ष चुनाव में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्ट आचरण को प्रमाणित करने में असफल रहा है। इसके चलते याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज करना उचित है।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर वर्ष 2025 में विवाद उत्पन्न हुआ था। इससे पहले 19 जुलाई 2025 को हुए चुनाव को उप जिलाधिकारी ने अनियमितताओं के आधार पर निरस्त कर दिया था और एल्डर कमेटी को पुनः प्रक्रिया कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद सचिव पद के लिए उपचुनाव कराया गया था, जिसकी अवधि भी सीमित रखी गई थी।
नया चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू नहीं करने पर विवाद बढ़ गया था। एल्डर कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन कई बार पत्र लिखकर चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का आग्रह किया, लेकिन तत्कालीन कार्यकारिणी पर चुनाव टालने के आरोप लगे। बाद में 14 नवंबर 2025 को चुनाव कराए गए। इसके बाद अतुल्य शर्मा और मुनीश कुमार त्यागी समेत कई अन्य प्रत्याशियों ने धारा 25 सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत याचिका दाखिल कर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
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यह था आरोप
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई, चुनाव नियमों का पालन नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान वे अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। अदालत ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया जिनमें भ्रष्ट आचरण, नामांकन की अनुचित अस्वीकृति और चुनाव परिणाम पर प्रभाव डालने वाली अनियमितताएं शामिल थीं। अदालत ने पाया कि न तो किसी उम्मीदवार के साथ अन्याय हुआ और न ही मतदाता सूची या मतदान प्रक्रिया में ऐसी कोई कमी साबित हुई, जिससे परिणाम प्रभावित हुआ हो। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी मतदाता को वोट देने से रोके जाने या नियमों के उल्लंघन का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन्हीं आधारों पर अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि पदाधिकारियों के चुनाव को निरस्त करने का कोई ठोस आधार नहीं बनता। इसलिए याचिका को निरस्त कर दिया गया। आदेश में यह भी कहा गया कि इसकी सत्यापित प्रति डिप्टी रजिस्ट्रार को भेजी जाए ताकि आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही की जा सके।
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