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पार्किंग ठेके खत्म, फिर भी पब्लिक से वसूली

Tue, 05 Apr 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
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पार्किंग - फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम के पार्किंग ठेकों की अवधि तो खत्म हो गई, लेकिन पब्लिक से वसूली नहीं रुकी है। निगम की लापरवाही के चलते समय पूरा होने के बावजूद यह ठेके बंद नहीं कराए गए हैं। इससे नगर निगम को लाखों रुपये प्रतिदिन का आर्थिक नुकसान हो रहा है। वाहन चालकों से वसूली जाने वाली रकम ठेकेदारों की जेब में जा रही है।
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नगर निगम ने पार्किंग ठेकों के लिए 52 स्थलों को चिह्नित किया था। इनमें 40 से ज्यादा पुराने और कुछ नए स्थल थे। ठेका अवधि पूरी होने से एक दिन पहले 30 मार्च को इन पार्किंग के ठेके छोड़े जाने थे, लेकिन धांधली की आशंका के चलते पार्षदों की कमेटी ने इन पर रोक लगा दी थी।

अब यह ठेके 11 अप्रैल को छोड़े जाएंगे। इसके बाद वर्क आर्डर जारी होते-होते एक सप्ताह से 10 दिन और बीत जाएंगे। लगभग पूरा महीना ही नगर निगम के यह ठेके लेट हो जाएंगे। नियमों के मुताबिक अवधि खत्म होने के बाद ही ठेकेदारों का कब्जा पार्किंग स्थल से हटा देना चाहिए।
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दूसरा ठेका होने तक पार्किंग फ्री की जानी चाहिए, या ठेकेदारों से अनुबंध कर उनकी अवधि अगले ठेके छोड़े जाने तक बढ़ाई जानी चाहिए। निगम ने दोनों ही काम नहीं किए।
यहां चल रहीं पार्किंग यशोदा अस्पताल नेहरू नगर, आराधना सिनेमा से अप्सरा बार्डर, महागुन मेट्रो मॉल, तुलसी निकेतन, डाबर ऑफिस के बाहर, एंजिल मॉल के बाहर, सर्वोदय अस्पताल के बाहर, कौशांबी मेट्रो स्टेशन के बाहर, पैसिफिक मॉल के बाहर, मोहननगर चौराहे पर बस स्टैंड के सामने, कौशांबी वेव सिनेमा के बाहर, श्रीकृष्ण वाटिका वैशाली, वैशाली मेट्रो स्टेशन के बाहर साइड पटरी के दोनों ओर, नवयुग मार्केट इलाहाबाद बैंक व पीएनबी के बाहर, शाप्रिक्स मॉल के बाहर वैशाली, आरके टावर वैशाली, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क के बाहर, ऑप्युलेंट मॉल के बाहर, चौधरी मॉल के बाहर, आरटीओ ऑफिस के बाहर, महालक्ष्मी टावर के बाहर, तहसील कंपाउंड के बाहर

मेयर बोले
अवधि खत्म होने के बाद भी पार्किंग स्टैंड चला रहे ठेकेदारों से अतिरिक्त दिन का पैसा वसूल कराया जाएगा। नगर आयुक्त से इस संबंध में वार्ता करेंगे। टेंडर की अवधि बढ़ाए जाने से ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा होगी। इसका फायदा नगर निगम को होगा। पहले से ज्यादा रेट नगर निगम को मिल सकते हैं। - अशु वर्मा, मेयर
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अवधि खत्म होने के अगले दिन ही पार्किंग स्टैंड बंद कराए जाने चाहिए थे। ऐसा नहीं हुआ तो ठेके चलाने वाले लोगों से अतिरिक्त दिनों का पैसा वसूला जाएगा। निगम को आर्थिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।  - बाबू सिंह आर्य, पार्किंग टेंडर कमेटी के सदस्य
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